चंदौली: फैक्ट्री में सिलेंडर में गैस भरने का हो रहा था काम, विस्फोट में तीन मजदूर जख्मी
चंदौली जिले की मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत चंदासी स्थित इंडियन एयर गैस लिमिटेड फैक्ट्री में बुधवार की भोर में सिलिंडर में एसिटिलीन गैस भरने के दौरान विस्फोट हो गया। इस दौरान वहां लगा टीन शेड विस्फोट से उड़ गया। वहीं आपरेटर समेत तीन लोग घायल हो गए। आनन-फानन में फैक्ट्री के लोगों ने घायलों को उपचार के लिए वाराणसी स्थित निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। सुबह लगभग साढ़े दस सूचना के बाद जब तक मुगलसराय कोतवाली पुलिस वहां पहुंची तब तक स्थल को पूरी तरह से साफ कर दिया गया था। बाद में सीएफओ भी मौके का निरीक्षण कर वापस लौट गए।
मुगलसराय कोतवाली कोतवाली क्षेत्र के चंदासी स्थित इंडियन एयर गैस लिमिटेड फैक्ट्री में ऑक्सीजन सिलिंडर व एसिटिलीन गैस भरने का कार्य किया जाता है। बाद में ऑक्सीजन सिलिंडर की सप्लाई निजी व सरकारी अस्पतालों में होती वहीं कटिंग के लिए एसिटिलीन गैस सिलिंडर की आपूर्ति रेलवे, डिफेंस समेत स्थानीय बाजारों में वेल्डिंग व लोहे के काटने के लिए इस्तेताल किया जाता है।
बुधवार की भोर में फैक्ट्री में कैल्शियम कार्बाइड से एसिटिलीन गैस बनाकर सिलेंडर में भरने का कार्य किया जा रहा था तभी अचानक से उसमें ब्लास्ट हो गया। इससे वहां लगी करकट की छत उड़ गई। साथ ही आसपास आग लग गई।
17 वर्ष पूर्व भी हो चुकी है घटना
चंदासी स्थित इंडियन एयर गैस लिमिटेड फैक्ट्री में 17 वर्ष पूर्व भी विस्फोट हो चुका है। लोगों ने बताया कि उस दौरान भी एसिटिलीन गैस का सिलिंडर रखने के दौरान विस्फोट हो गया और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। बताया कि जाता है कि फैक्ट्री लगभग 64 साल पुरानी है।ऐसे में यहां लगे उपकरण भी काफी पुराने हो चुके होंगे और उन्हीं से सिलिंडर में गैस भरे जाने का कार्य होता है। जिस वक्त यहां फैक्ट्री लगाई गई तो उस वक्त यहां आबादी नहीं थी। आज धीरे-धीरे फैक्ट्री के इर्द गिर्द काफी आबादी बस चुकी है। ऐसे में कभी कोई बड़ा विस्फोट हुआ तो उससे काफी जानमाल के नुकसान की आशंका है।
एलपीजी गैस के मिलावट का भी होता है खेल
चंदासी स्थित फैक्ट्री में आक्सीजन के अलावा एसिटिलीन गैस तैयार करने का कार्य किया जाता है। इसकी आड़ में एसिटिलीन गैस के सिलिंडर में एलपीजी गैस को भरकर बेचा जाता है। सूत्र का कहना है कि एक सिलिंडर में लगभग साढ़े छह किलो एसिटिलीन गैस होती है जिसकी कीमत 15 सौ रुपये पड़ती है।
जबकि एक हजार रुपये में कार्मिशियल एलपीजी सिलिंडर में लगभग 19 किलो गैस मिल जाती है। फैक्ट्री के एसिटिलीन के सिलिंडर में एलपीजी गैैस भरकर लोहे की कटिंग के लिए बेचा जाता है। फैक्ट्री में चल रहा यह खेल किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है।