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हाथों से बनाई राखी बांधेंगे बच्चे
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पीडीडीयू नगर। कोरोना संक्रमण के चलते बाजार जाने से लोग डर रहे हैं। ऐसे में अधिकतर घरों में बच्चों को हाथों से राखी बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। नगर के विभिन्न मुहल्लों में बच्चे हाथों से राखी बना रहे है। बच्चों का स्कूल भी बंद है। ऐेसे में बच्चे हाथों से राखी बनाकर उसे ही हाथों पर सजाना चाह रहे हैं।
भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन तीन अगस्त को मनाई जाएगी। इसके लिए बाजार में तैयारियां पूरी की जा चुकी है। हालांकि कभी साप्ताहिक बंदी तो कभी दाएं बाएं पटरी का फार्मुला बाजार में रौनक नहीं लौट पा रही है। वहीं लोग राखियों को खरीदने से भी डर रहे हैं। इस विपरीत परिस्थितियों में बच्चों ने स्वयं ही राखी बनाना शुरू कर दी। चंदासी के वृंदावन कॉलोनी निवासी ऐश्वर्या श्रीवास्तव, शौर्य श्रीवास्तव, शुभांष श्रीवास्तव, श्रेयांश श्रीवास्तव आदि रंग बिरंगे कागजों से आकर्षक राखियां तैयार की है। इनके अभिभावक शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों के स्कूल बंद हैं। वहीं बच्चों को इससे अपनी कला दिखाने का भी मौका मिल रहा है और हाथों से बनाई राखी से उनका उत्साह वर्धन भी हो रहा है।
बबुरी। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से लोगों के सामने भुखमरी की स्थिति है। इसी बीच तीन अगस्त को भाई बहन के अमर प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन मनाया जाएगा। इसको देखते हुए जिला पंचायत सदस्य भाजपा नेता सूर्यमुनी तिवारी ने इलाके में भ्रमण कर लोगों के बीच मास्क और राखी वितरित की। इस दौरान लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाने का आह्वान किया। सूर्यमुनी तिवारी ने धरकार बस्ती और सेवा बस्ती में सैकड़ों बच्चे और महिलाओं के बीच राखी वितरत किया। दूसरी तरफ सामाजिक संस्था कबीर मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से बबुरी सहित आस पास के इलाकों में गरीबों के बीच राखी वितरित की गई।
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चकिया। विकास खंड के हाजीपुर गांव के पास स्थित दुलहिया दाई का सती स्थल आज भी आस-पास के गांवों के लोगो के आस्था का प्रमुख केंद्र है। किंवदंतियों के अनुसार दुलहिया दाई के सती होने के पीछे रक्षाबंधन के पर्व की महत्ता स्थापित है। अज्ञात दुल्हन दुलहिया दाई की ओर से भेजी गई राखी की इज्जत बचाने के लिए सिकंदरपुर के मुस्लिम सुबेदार सिकंदर शाह का दुलहिया दाई के अपहरण करने की कोशिश कर रहे अज्ञात राजा की सेना के साथ युद्ध करने की कथा भी क्षेत्र में प्रचलित है। जो मुगल बादशाह हुमायूँ और चित्तौड़ की रानी कर्मवती की दास्तान को दुहराती प्रतीत होती है।
सिकंदरपुर निवासी बयोवृद्ध नागरिक जैनुल आब्दीन कहते हैं कि उनके दादा ने यह कहानी सुनाई थी। उनके अनुसार केरा-मंगरौर परगना मुगलों के हाथ से निकलकर अवध के नबाबों के हाथ में चला गया था। अवध के नबाब याहिया मिर्जा अमानी ने सिकंदर शाह को सिकंदरपुर का सुबेदार नियुक्त किया था। सिकंदर शाह ने सिकंदरपुर में चंद्रप्रभा नदी के किनारे एक सुदृढ़ किले का निर्माण कराया था। बिहार प्रांत से शादी करके अपनी नई नवेली दुल्हन को लेकर एक जागीरदार का पुत्र दूल्हा चकिया से होते हुए मिर्जापुर जनपद के किसी स्थान पर जा रहा था। उसी दौरान हाजीपुर गांव के पास अज्ञात हमलावरों ने दूल्हे के काफिले को रोक लिया तथा दुल्हन को अपने हवाले करने का आदेश दिया। इससे क्रोधित होकर दूल्हा हमलावरो से अपने साथियों के साथ युद्ध करने लगा और शहीद हा गया। बेबस दुल्हन ने हरकारे के जरिये सिकंदरपुर के सुबेदार सिकंदर शाह के पास राखी भेजकर मदद देने की गुहार लगाई। अज्ञात बहन की गुहार पर सिकंदर शाह तत्काल अपनी सेना के साथ हाजीपुर गांव के पास पहुंचे और बहन की इज्ज्त बचाई। इस युद्ध में सिकंदर शाह घायल हो गए और कुछ दिनो बाद मौत हो गई। वहीं पति को खो चुकी दुल्हन ने पति की मौत के गम में आग लगाकर जान दे दी। सैकड़ों वर्षों के बाद भी दुलहिया दाई का सती स्थल आज भी भाई-बहन के अमर प्रेम में राखी के महत्व की याद दिलाता है।
रिपोर्ट और संपादन- कृष्ण मुरारी मिश्र
बाइट-3600
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भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन तीन अगस्त को मनाई जाएगी। इसके लिए बाजार में तैयारियां पूरी की जा चुकी है। हालांकि कभी साप्ताहिक बंदी तो कभी दाएं बाएं पटरी का फार्मुला बाजार में रौनक नहीं लौट पा रही है। वहीं लोग राखियों को खरीदने से भी डर रहे हैं। इस विपरीत परिस्थितियों में बच्चों ने स्वयं ही राखी बनाना शुरू कर दी। चंदासी के वृंदावन कॉलोनी निवासी ऐश्वर्या श्रीवास्तव, शौर्य श्रीवास्तव, शुभांष श्रीवास्तव, श्रेयांश श्रीवास्तव आदि रंग बिरंगे कागजों से आकर्षक राखियां तैयार की है। इनके अभिभावक शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों के स्कूल बंद हैं। वहीं बच्चों को इससे अपनी कला दिखाने का भी मौका मिल रहा है और हाथों से बनाई राखी से उनका उत्साह वर्धन भी हो रहा है।
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बबुरी। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से लोगों के सामने भुखमरी की स्थिति है। इसी बीच तीन अगस्त को भाई बहन के अमर प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन मनाया जाएगा। इसको देखते हुए जिला पंचायत सदस्य भाजपा नेता सूर्यमुनी तिवारी ने इलाके में भ्रमण कर लोगों के बीच मास्क और राखी वितरित की। इस दौरान लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाने का आह्वान किया। सूर्यमुनी तिवारी ने धरकार बस्ती और सेवा बस्ती में सैकड़ों बच्चे और महिलाओं के बीच राखी वितरत किया। दूसरी तरफ सामाजिक संस्था कबीर मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से बबुरी सहित आस पास के इलाकों में गरीबों के बीच राखी वितरित की गई।
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चकिया। विकास खंड के हाजीपुर गांव के पास स्थित दुलहिया दाई का सती स्थल आज भी आस-पास के गांवों के लोगो के आस्था का प्रमुख केंद्र है। किंवदंतियों के अनुसार दुलहिया दाई के सती होने के पीछे रक्षाबंधन के पर्व की महत्ता स्थापित है। अज्ञात दुल्हन दुलहिया दाई की ओर से भेजी गई राखी की इज्जत बचाने के लिए सिकंदरपुर के मुस्लिम सुबेदार सिकंदर शाह का दुलहिया दाई के अपहरण करने की कोशिश कर रहे अज्ञात राजा की सेना के साथ युद्ध करने की कथा भी क्षेत्र में प्रचलित है। जो मुगल बादशाह हुमायूँ और चित्तौड़ की रानी कर्मवती की दास्तान को दुहराती प्रतीत होती है।
सिकंदरपुर निवासी बयोवृद्ध नागरिक जैनुल आब्दीन कहते हैं कि उनके दादा ने यह कहानी सुनाई थी। उनके अनुसार केरा-मंगरौर परगना मुगलों के हाथ से निकलकर अवध के नबाबों के हाथ में चला गया था। अवध के नबाब याहिया मिर्जा अमानी ने सिकंदर शाह को सिकंदरपुर का सुबेदार नियुक्त किया था। सिकंदर शाह ने सिकंदरपुर में चंद्रप्रभा नदी के किनारे एक सुदृढ़ किले का निर्माण कराया था। बिहार प्रांत से शादी करके अपनी नई नवेली दुल्हन को लेकर एक जागीरदार का पुत्र दूल्हा चकिया से होते हुए मिर्जापुर जनपद के किसी स्थान पर जा रहा था। उसी दौरान हाजीपुर गांव के पास अज्ञात हमलावरों ने दूल्हे के काफिले को रोक लिया तथा दुल्हन को अपने हवाले करने का आदेश दिया। इससे क्रोधित होकर दूल्हा हमलावरो से अपने साथियों के साथ युद्ध करने लगा और शहीद हा गया। बेबस दुल्हन ने हरकारे के जरिये सिकंदरपुर के सुबेदार सिकंदर शाह के पास राखी भेजकर मदद देने की गुहार लगाई। अज्ञात बहन की गुहार पर सिकंदर शाह तत्काल अपनी सेना के साथ हाजीपुर गांव के पास पहुंचे और बहन की इज्ज्त बचाई। इस युद्ध में सिकंदर शाह घायल हो गए और कुछ दिनो बाद मौत हो गई। वहीं पति को खो चुकी दुल्हन ने पति की मौत के गम में आग लगाकर जान दे दी। सैकड़ों वर्षों के बाद भी दुलहिया दाई का सती स्थल आज भी भाई-बहन के अमर प्रेम में राखी के महत्व की याद दिलाता है।
रिपोर्ट और संपादन- कृष्ण मुरारी मिश्र
बाइट-3600