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गर्मी से पहले ही जल संकट, सूखने लगे हैंडपंप के कंठ
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पीडीडीयू नगर। गर्मी आने के पहले ही जिले में पेयजल संकट गहराने लगता है। जलस्तर घटने से पानी की समस्या शुरू हो जाती है। वर्तमान में पहाड़ी व तटीय क्षेत्रों में जल संकट शुरू हो गया है। गर्मी बढ़ने के साथ इन इलाकों में जल संकट गहराने की आशंका है।
जिले में पेयजल संकट को दूर करने के लिए अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई थी पर हर घर-नल से जल योजना के तहत कई गांवों में पानी की टंकी व ट्यूबवेल आदि की व्यवस्था की जा रही है। योजना को वर्ष 2024 तक पूरा कर लिया जाना है। इसके बाद काफी हद तक पेयजल की समस्या समाप्त हो जाएगी। वर्तमान में पहाड़ी व नदियों के तट पर बसे गांवों को पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। नक्सल प्रभावित नौगढ़ के पहाड़ी व शिकारगंज के तटीय क्षेत्र में अभी से पानी की समस्या गहराने लगी है।
सूख जाते हैं कुएं, काफी समय से ओवरहेड टैंक की मांग
शिकारगंज। क्षेत्र के मिर्जापुर जनपद से सटे गरई नदी के किनारे मुबारकपुर व हिनौती दक्षिणी गांव में गर्मी के दिनों में हैंडपंप तथा कुएं का पानी सूख जाता है। इससे यहां के ग्रामीणों को कुछ हैंडपंपों के सहारे ही पेयजल के लिए लाइन लगाकर जूझना पड़ता है। इन गांवों के ग्रामीण काफी दिनों से ओवरहेड टैंक के जरिए पेयजल उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।संवाद
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जंगली नालों और प्राकृतिक जल स्रोतों से बुझानी पड़ती है प्यास
नौगढ़। विकासखंड में अभी गर्मी शुरू भी नहीं हुई है और लोगों को पीने के पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हैंडपंपों के मरम्मत का काम भी रुका हुआ है जिससे समस्या गंभीर होती जा रही है। स्थिति यह है कि गांव में लगे हैंडपंप अभी से ही सूखने लगे हैं और बंधियों का जलस्तर भी घट रहा है। स्कूलों में लगे हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। क्षेत्र के सेमर साधोपुर, शाहपुर, टिकुरिया, गंगापुर, बाघी, देवरी कला, गढ़वा, बरबसपुर, नरकटी, जयमोहनी, खुथहड़, सेमरिया, मगरही गांवों में स्थिति ज्यादा खराब है। देखने के लिए तो इन गांवों में सोलर पंप, नलकूप और टंकिया सब हैं लेकिन सभी बेकार हैं। महिलाओं को दूरदराज से ढोकर पानी लाना पड़ता है। लोगों को पानी के लिए कुओं, जंगली नालों और प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझानी पड़ रही है।
नौगढ़। इलाके के सांसद रहे कुंवर छोटेलाल खरवार ने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर पेयजल किल्लत को दूर करने का दावा किया था। उन्होंने गांवों में पाइप लाइन बिछाने का दावा किया था पर हुआ कुछ भी नहीं। कुछ ही माह बाद गर्मी शुरू हो जाएगी। अभी से ही लोगों को पेयजल एक बड़ी समस्या नजर आने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यही हाल रहा तो मई जून के महीनों में तो एक-एक बाल्टी पानी के लिए पसीना बहाना पड़ेगा।
गर्मी शुरू होने के पूर्व ही खराब पड़े हैंडपंपों का सर्वे कराकर उन्हें ठीक कराया जाएगा। जिन हैंडपंपों ने पानी देना छोड़ दिया है उन्हें रिबोर कराया जाएगा। इसके अलावा बंद पड़ी पेयजल योजनाओं को भी आरंभ कराने का प्रयास किया जाएगा। प्रेमचंद, सहायक विकास अधिकारी।
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जिले में पेयजल संकट को दूर करने के लिए अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई थी पर हर घर-नल से जल योजना के तहत कई गांवों में पानी की टंकी व ट्यूबवेल आदि की व्यवस्था की जा रही है। योजना को वर्ष 2024 तक पूरा कर लिया जाना है। इसके बाद काफी हद तक पेयजल की समस्या समाप्त हो जाएगी। वर्तमान में पहाड़ी व नदियों के तट पर बसे गांवों को पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। नक्सल प्रभावित नौगढ़ के पहाड़ी व शिकारगंज के तटीय क्षेत्र में अभी से पानी की समस्या गहराने लगी है।
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सूख जाते हैं कुएं, काफी समय से ओवरहेड टैंक की मांग
शिकारगंज। क्षेत्र के मिर्जापुर जनपद से सटे गरई नदी के किनारे मुबारकपुर व हिनौती दक्षिणी गांव में गर्मी के दिनों में हैंडपंप तथा कुएं का पानी सूख जाता है। इससे यहां के ग्रामीणों को कुछ हैंडपंपों के सहारे ही पेयजल के लिए लाइन लगाकर जूझना पड़ता है। इन गांवों के ग्रामीण काफी दिनों से ओवरहेड टैंक के जरिए पेयजल उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।संवाद
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जंगली नालों और प्राकृतिक जल स्रोतों से बुझानी पड़ती है प्यास
नौगढ़। विकासखंड में अभी गर्मी शुरू भी नहीं हुई है और लोगों को पीने के पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हैंडपंपों के मरम्मत का काम भी रुका हुआ है जिससे समस्या गंभीर होती जा रही है। स्थिति यह है कि गांव में लगे हैंडपंप अभी से ही सूखने लगे हैं और बंधियों का जलस्तर भी घट रहा है। स्कूलों में लगे हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। क्षेत्र के सेमर साधोपुर, शाहपुर, टिकुरिया, गंगापुर, बाघी, देवरी कला, गढ़वा, बरबसपुर, नरकटी, जयमोहनी, खुथहड़, सेमरिया, मगरही गांवों में स्थिति ज्यादा खराब है। देखने के लिए तो इन गांवों में सोलर पंप, नलकूप और टंकिया सब हैं लेकिन सभी बेकार हैं। महिलाओं को दूरदराज से ढोकर पानी लाना पड़ता है। लोगों को पानी के लिए कुओं, जंगली नालों और प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझानी पड़ रही है।
नौगढ़। इलाके के सांसद रहे कुंवर छोटेलाल खरवार ने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर पेयजल किल्लत को दूर करने का दावा किया था। उन्होंने गांवों में पाइप लाइन बिछाने का दावा किया था पर हुआ कुछ भी नहीं। कुछ ही माह बाद गर्मी शुरू हो जाएगी। अभी से ही लोगों को पेयजल एक बड़ी समस्या नजर आने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यही हाल रहा तो मई जून के महीनों में तो एक-एक बाल्टी पानी के लिए पसीना बहाना पड़ेगा।
गर्मी शुरू होने के पूर्व ही खराब पड़े हैंडपंपों का सर्वे कराकर उन्हें ठीक कराया जाएगा। जिन हैंडपंपों ने पानी देना छोड़ दिया है उन्हें रिबोर कराया जाएगा। इसके अलावा बंद पड़ी पेयजल योजनाओं को भी आरंभ कराने का प्रयास किया जाएगा। प्रेमचंद, सहायक विकास अधिकारी।