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तीसरी लहर में बच्चों को सुरक्षित रखेगी विटामिन-ए और आयरन की खुराक
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चंदौली। जिले में शिशु संरक्षण की विशेष देखभाल के तहत बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें विटामिन-ए और आयरन सीरप की खुराक दी जा रही है। इसके वितरण के साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लोगों को इसके फायदे के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। बताया जा रहा है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक होने से कोरोना के तीसरी लहर में बच्चे सुरक्षित हो सकते हैं।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राम प्रकाश मौर्या ने बताया कि जिले की कुल 1823 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों को दवा वितरण करेंगी। किसी भी बीमारी से बचाव करने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता आवश्यक होती है। विशेषकर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार के साथ ही उन्हें विटामिन-ए और आयरन की खुराक भी दी जाती है। यह खुराक नौ माह से पांच साल तक के बच्चों को छह माह में एक बार दी जाती है। विटामिन-ए की खुराक से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साथ ही कुपोषण में भी कमी आती है। बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए हर छह महीने में शिशु संरक्षण माह का आयोजन किया जाता है। इस दौरान जिले में नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी जाती है तथा छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को आयरन सीरप की खुराक पिलाई जाती है।
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राम प्रकाश मौर्या ने बताया कि जिले की कुल 1823 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों को दवा वितरण करेंगी। किसी भी बीमारी से बचाव करने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता आवश्यक होती है। विशेषकर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार के साथ ही उन्हें विटामिन-ए और आयरन की खुराक भी दी जाती है। यह खुराक नौ माह से पांच साल तक के बच्चों को छह माह में एक बार दी जाती है। विटामिन-ए की खुराक से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साथ ही कुपोषण में भी कमी आती है। बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए हर छह महीने में शिशु संरक्षण माह का आयोजन किया जाता है। इस दौरान जिले में नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी जाती है तथा छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को आयरन सीरप की खुराक पिलाई जाती है।
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