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Chandauli News: पीडीडीयू मंडल के 120 इंजनों में पहली बार लगाए गए यूरिनल, 72 में एसी
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लोको इंजन में लगा यूरिनल। स्रोत:-जागरूक पाठक
ट्रेनों को चलाने वाले लोको पायलटों को अब यूरिनल की सुविधा इंजन में ही मिलेगी। मंडल के 102 इंजनों में यूरिनल बनाए गए हैं। यही नहीं लोको इंजनों में एसी लगाने की प्रक्रिया भी तेजी पर है। 72 लोको में एसी लगाए जा चुके हैं।
इसके पहले चालक और परिचालक को पेशाब लगने पर स्टेशन आने का इंतजार करना पड़ता है या ट्रेन बीच में रोकना पड़ता था। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में काफी परेशानी होती थी। इस समस्या को देखते हुए लोको शेड पीडीडीयू रेल मंडल के लोको पायलटों की सुविधा के लिए रेलवे बोर्ड और आरडीएसओ के निर्देश के अनुसार पिछले वर्ष इलेक्ट्रिक इंजनों में वॉटरलेस यूरिनल लगाने की शुरूआत की। वर्तमान में 102 लोको में यूरिनल की व्यवस्था की जा चुकी है। विभाग के अनुसार इस वर्ष के अंत तक सभी इंजनों में इसे लगा दिया जाएगा। इससे ड्यूटी के दौरान लोको पायलटों (महिला व पुरुष दोनों) को इंजन से उतरकर बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पीडीडीयू मंडल में लगभग 23 सौ लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट हैं। इसमें महिला लाेको पायलट भी शामिल हैं। इस संबध में ईसीआरईयू के मंडल सचिव और चालक डीके मिश्र ने कहा कि लोको पायलट लंबे समय से इंजन में यूरिनल की व्यवस्था करने और एसी लगाने की मांग कर रहे थे। इंजन में यूरिनल की व्यवस्था होने से चालकों को आसानी होगी। यूरिनल में पैसिव इन्फ्रारेड (पीआईआर) सेंसर होता है। यह एक ऐसा सेंसर है जो इन्फ्रारेड विकिरण में परिवर्तन का पता लगाता है, जो आमतौर पर मानव शरीर द्वारा उत्सर्जित होता है। यह सेंसर यूरिनल को स्वचालित रूप से फ्लश करने के लिए उपयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति यूरिनल के पास होता है। यह वॉटरलेस यूरिनल केवल मानव गतिविधि पर सक्रिय होता है। इसमें सैनिटाइज़र, परफ्यूम सो, एलईडी लाइट, एग्जॉस्ट फैन और रपीड कंट्रोल ऑटोमैटिक डोर जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह यूनिट केवल तब खुलेगी जब इंजन रूका होगा। तेज गति में रहते हुए दरवाजा स्वतः लॉक रहेगा। पीआईआर सेंसर एक पायरोइलेक्ट्रिक सेंसर का उपयोग करता है जो इन्फ्रारेड जिकिरण में परिवर्तन का पता लगाता है। जब कोई व्यक्ति यूरिनल के पास होता है, तो उनका शरीर इन्फ्रारेड विकिरण उत्सर्जित करता है, जिससे सेंसर को पता चलता है कि कोई व्यक्ति पास है और पलशिग तंत्र को सक्रिय करता है, जिरासे यूरिनल फ्लश हो जाता है। यह स्वचालित होगा जिससे उपयोगकर्ता को हाथ लगाने की आवश्यकता नहीं होती है और यह स्वच्छता में सुधार करता है।लोको इंजनों में एसी और यूरिनल की व्यवस्था की जा रही है लेकिन मेमू ट्रेनों में अब तक इसकी व्यवस्था नहीं की सकी है। इससे इससे चालकों की परेशानी बनी हुई है।
विश्वनाथ, मंडल जनसंपर्क अधिकारी, पीडीडीयू मंडल ने बताया किया चालकों की समस्या को देखते हुए सभी लोको में यूरिनल और एसी की व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में 102 लोको में यूरिनल की व्यवस्था की जा चुकी है। वहीं 72 इंजन में एसी लगाए जा चुके हैं। इस वर्ष मंडल के सभी इंजनों में यूरिनल और एसी लगा दिया जाएगा।
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इसके पहले चालक और परिचालक को पेशाब लगने पर स्टेशन आने का इंतजार करना पड़ता है या ट्रेन बीच में रोकना पड़ता था। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में काफी परेशानी होती थी। इस समस्या को देखते हुए लोको शेड पीडीडीयू रेल मंडल के लोको पायलटों की सुविधा के लिए रेलवे बोर्ड और आरडीएसओ के निर्देश के अनुसार पिछले वर्ष इलेक्ट्रिक इंजनों में वॉटरलेस यूरिनल लगाने की शुरूआत की। वर्तमान में 102 लोको में यूरिनल की व्यवस्था की जा चुकी है। विभाग के अनुसार इस वर्ष के अंत तक सभी इंजनों में इसे लगा दिया जाएगा। इससे ड्यूटी के दौरान लोको पायलटों (महिला व पुरुष दोनों) को इंजन से उतरकर बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पीडीडीयू मंडल में लगभग 23 सौ लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट हैं। इसमें महिला लाेको पायलट भी शामिल हैं। इस संबध में ईसीआरईयू के मंडल सचिव और चालक डीके मिश्र ने कहा कि लोको पायलट लंबे समय से इंजन में यूरिनल की व्यवस्था करने और एसी लगाने की मांग कर रहे थे। इंजन में यूरिनल की व्यवस्था होने से चालकों को आसानी होगी। यूरिनल में पैसिव इन्फ्रारेड (पीआईआर) सेंसर होता है। यह एक ऐसा सेंसर है जो इन्फ्रारेड विकिरण में परिवर्तन का पता लगाता है, जो आमतौर पर मानव शरीर द्वारा उत्सर्जित होता है। यह सेंसर यूरिनल को स्वचालित रूप से फ्लश करने के लिए उपयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति यूरिनल के पास होता है। यह वॉटरलेस यूरिनल केवल मानव गतिविधि पर सक्रिय होता है। इसमें सैनिटाइज़र, परफ्यूम सो, एलईडी लाइट, एग्जॉस्ट फैन और रपीड कंट्रोल ऑटोमैटिक डोर जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह यूनिट केवल तब खुलेगी जब इंजन रूका होगा। तेज गति में रहते हुए दरवाजा स्वतः लॉक रहेगा। पीआईआर सेंसर एक पायरोइलेक्ट्रिक सेंसर का उपयोग करता है जो इन्फ्रारेड जिकिरण में परिवर्तन का पता लगाता है। जब कोई व्यक्ति यूरिनल के पास होता है, तो उनका शरीर इन्फ्रारेड विकिरण उत्सर्जित करता है, जिससे सेंसर को पता चलता है कि कोई व्यक्ति पास है और पलशिग तंत्र को सक्रिय करता है, जिरासे यूरिनल फ्लश हो जाता है। यह स्वचालित होगा जिससे उपयोगकर्ता को हाथ लगाने की आवश्यकता नहीं होती है और यह स्वच्छता में सुधार करता है।लोको इंजनों में एसी और यूरिनल की व्यवस्था की जा रही है लेकिन मेमू ट्रेनों में अब तक इसकी व्यवस्था नहीं की सकी है। इससे इससे चालकों की परेशानी बनी हुई है।
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विश्वनाथ, मंडल जनसंपर्क अधिकारी, पीडीडीयू मंडल ने बताया किया चालकों की समस्या को देखते हुए सभी लोको में यूरिनल और एसी की व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में 102 लोको में यूरिनल की व्यवस्था की जा चुकी है। वहीं 72 इंजन में एसी लगाए जा चुके हैं। इस वर्ष मंडल के सभी इंजनों में यूरिनल और एसी लगा दिया जाएगा।
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