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उन्नतिशील फसल को खेतों में डालें जैविक खाद

Sat, 07 Nov 2020 01:02 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 07 Nov 2020 01:02 AM IST
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urea
केवीके में किसानों को नि:शुल्क दलहनी और तिलहनी फसलों का बीज वितरित किया गया - फोटो : CHANDAULI
चंदौली। कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को नि:शुल्क दलहनी और तिलहनी फसलों के बीज का वितरण किया गया। केवीके डा. एसपी सिंह ने केवीके की ओर से चयनित सौ किसानों को नि:शुल्क उन्नत प्रजाति के बीज दिए। साथ किसानों को उत्पादन और आधूनिक खेती के संबंध में जानकारी दी। उन्होने रासायनिक की जगह जैविक और देसी खादों के प्रयोग पर जोर दिया। डा. एसपी सिंह ने कहा कि आधूनिक खेती करने पर अन्नदाताओं की आय दोगुनी हो सकती है। इसके लिए परंपरागत खेती के साथ नकदी फसलों के उत्पादन पर किसानों को पहल करने की जरुरत है। कृषि वैज्ञानिक डा. समीर पांडेय ने कहा कि मंसूर की प्रजाति एनडीएल वन का उत्पादन 135 से 140 दिनों के बीच लगभग 20 से 25 कुंतल प्रति हेेक्टेयर प्राप्त होता है। इसके अलवा सरसों की एनडीआर 850 प्रजाति का उत्पादन 125 से 130 दिनों के बीच 25 से 30 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। बताया कि चना की प्रजाति पूसा 362 का उत्पादन 140 से 145 दिनों के बीच 22 से 25 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। जो विभिन्न प्रकार के रोग अवरोधी है। कहा कि जिले के दरियापुर, रामगढ़, सुल्तानपुर, उसरी, विजयनारायनपुर, करेमुआ के किसानों को बीज वितरण के चयनित किया गया था। इस दौरान डा.रितेश गंगवार, डा. कृष्ण मुरारी पांडेय उपस्थित रहे।
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