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क्षय रोगियों की 24 मार्च तक नियमित होगी जांच
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चंदौली। जिले में विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह के तहत दस्तक पखवारा मनाया जा रहा है। इसमें संचारी रोग को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास तलाशे जा रहे हैं। अभियान के तहत क्षय रोगियों को चिन्हित कर उनका मुफ्त इलाज व सहायता राशि दिए जाने की योजना है।
जनपद में कोरोना काल के दौरान टीबी रोगियों का विशेष ध्यान रखने के साथ ही वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मद्देनजर अभियान चलाकर 24 मार्च तक क्षय रोगियों की नियमित जांच व उनका इलाज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बुखार व क्षय रोग के लक्षण वाले मरीजों की सूची तैयार कर तत्काल इलाज मुहैया कराए जाने का निर्देश दिया गया है। जिले में वर्ष 2020 जनवरी से अब तक कुल 2850 क्षय रोगियों को चिह्नित कर उनका इलाज किया जा रहा है। इसमें 1565 मरीजों का पूर्ण इलाज कर 51 लाख 48 हजार 500 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। वहीं 1219 रोगियों का इलाज किया जा रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. डीएन मिश्रा ने बताया कि छिपाने से टीबी की बीमारी बढ़ती है। यह परिजनों को भी अपनी चपेट में ले लेती है। समय से इलाज न कराना व पूरा इलाज न होने पर टीबी का फिर से इलाज शुरू करने में लंबा समय लगता है। एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी का रूप भी ले सकता है। टीबी का इलाज छह माह तक चलता है। एमडीआर केस में यह इलाज नौ से 11 माह तक चलता है। कहा कि संचारी रोग अभियान के तहत गांव में घर-घर जाकर आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्री लोगों की टीबी स्क्रीनिंग करेंगी। इसमें टीबी के मरीजों के बलगम की जांच करने व टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल इलाज मुहैया कराया जाएगा।
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जनपद में कोरोना काल के दौरान टीबी रोगियों का विशेष ध्यान रखने के साथ ही वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मद्देनजर अभियान चलाकर 24 मार्च तक क्षय रोगियों की नियमित जांच व उनका इलाज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बुखार व क्षय रोग के लक्षण वाले मरीजों की सूची तैयार कर तत्काल इलाज मुहैया कराए जाने का निर्देश दिया गया है। जिले में वर्ष 2020 जनवरी से अब तक कुल 2850 क्षय रोगियों को चिह्नित कर उनका इलाज किया जा रहा है। इसमें 1565 मरीजों का पूर्ण इलाज कर 51 लाख 48 हजार 500 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। वहीं 1219 रोगियों का इलाज किया जा रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. डीएन मिश्रा ने बताया कि छिपाने से टीबी की बीमारी बढ़ती है। यह परिजनों को भी अपनी चपेट में ले लेती है। समय से इलाज न कराना व पूरा इलाज न होने पर टीबी का फिर से इलाज शुरू करने में लंबा समय लगता है। एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी का रूप भी ले सकता है। टीबी का इलाज छह माह तक चलता है। एमडीआर केस में यह इलाज नौ से 11 माह तक चलता है। कहा कि संचारी रोग अभियान के तहत गांव में घर-घर जाकर आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्री लोगों की टीबी स्क्रीनिंग करेंगी। इसमें टीबी के मरीजों के बलगम की जांच करने व टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल इलाज मुहैया कराया जाएगा।
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