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भागवत की महिमा बताई
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Thu, 07 Jan 2016 01:36 AM IST
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श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन जीयर स्वामी जी महराज ने भगवान सुखदेव की
कथा सुनाते हुए भगवान की भक्ति और भागवत कथा को मुक्ति का मार्ग प्रशस्त
करने वाला बताया।
महाराज ने कहा कि माया रूपी संसार में पैदा होने के बाद मनुष्य संसारिक बंधन व मोह माया में फंस ही जाता है। भगवान की भक्ति एवं भागवत कथा का श्रवण करने से ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। किसी कार्य या विषय वस्तु पर संपन्न होने पर मनुष्य को अहम नही करना चाहिए।
वह अगर भगवान का भक्त है और उसे अहम हो गया तो भगवान अपने भक्त को पथ से भटकते देख उसके साथ लीला कर मार्ग प्रशस्त करते हैं। कहा कि जब नारद को काम वासना पर विजय मिली तो उन्हें गर्व हो गया।
वे स्वयं भगवान विष्णु से अपनी प्रशंसा करने लगे।
भगवान ने भक्त को पथ भ्रष्ट होते देख एक माया नगरी का निर्माण किया और उसमें एक सुन्दर सी कन्या की रचना की और महर्षि नारद को बुलवाया और भाग्य रेखा देखने की बात कही।
पथभ्रष्ट होने पर बुद्धि भी काम नही करती। इस मौके पर विंध्याचल तिवारी, ग्राम प्रधान भजुराम सिंह चौहान, छेदी सिंह, राजेन्द्र प्रताप सिंह, राजेन्द्र पांडेय, बालचरन यादव, अशोक मिश्रा, डा. विनोद यादव, अशेाक यादव आदि उपस्थित रहे।
महाराज ने कहा कि माया रूपी संसार में पैदा होने के बाद मनुष्य संसारिक बंधन व मोह माया में फंस ही जाता है। भगवान की भक्ति एवं भागवत कथा का श्रवण करने से ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। किसी कार्य या विषय वस्तु पर संपन्न होने पर मनुष्य को अहम नही करना चाहिए।
वह अगर भगवान का भक्त है और उसे अहम हो गया तो भगवान अपने भक्त को पथ से भटकते देख उसके साथ लीला कर मार्ग प्रशस्त करते हैं। कहा कि जब नारद को काम वासना पर विजय मिली तो उन्हें गर्व हो गया।
वे स्वयं भगवान विष्णु से अपनी प्रशंसा करने लगे।
भगवान ने भक्त को पथ भ्रष्ट होते देख एक माया नगरी का निर्माण किया और उसमें एक सुन्दर सी कन्या की रचना की और महर्षि नारद को बुलवाया और भाग्य रेखा देखने की बात कही।
पथभ्रष्ट होने पर बुद्धि भी काम नही करती। इस मौके पर विंध्याचल तिवारी, ग्राम प्रधान भजुराम सिंह चौहान, छेदी सिंह, राजेन्द्र प्रताप सिंह, राजेन्द्र पांडेय, बालचरन यादव, अशोक मिश्रा, डा. विनोद यादव, अशेाक यादव आदि उपस्थित रहे।