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Chandauli News: सर्विस लेन पर वाहन चलवाकर देते हैं ड्राइविंग लाइसेंस

Fri, 16 Jan 2026 01:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jan 2026 01:00 AM IST
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They issue driving licenses after making applicants drive on the service lane
पचफेड़वा ​स्थित उपसंभागीय परिवहन कार्यालय। संवाद
पीडीडीयू नगर। जिले को बने 26 वर्ष हो चुके हैं। इसके बावजूद अब तक डेडिकेटेड ड्राइविंग ट्रैक का निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसे में चार पहिया वाहन बनवाने के लिए आवेदकों का टेस्ट हाईवे किनारे बने सर्विस लेन और खाली पड़ी भूमि पर लेकर ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाता है। वहीं बड़े वाहनोंं का ड्राइविंग लाइसेंस ट्रेनिंग सेंटर से ट्रेनिंग के प्रमाण पत्र पर दिया जाता है।
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जिले में हर वर्ष 600 से अधिक भारी वाहनों के लाइसेंस परिवहन विभाग की ओर से जारी किये जाते हैं। हर वर्ष कुल 15 हजार से ज्यादा वाहनों का बिना डेडिकेटेड ड्राइविंग ट्रैक के ही ड्राइविंग लाइसेंस दिया गया है। अब तक जिले में करीब 55 हजार लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं।
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वाराणसी से अलग होकर चंदौली जिले को बने 26 वर्ष हो चुके हैं। इसके बावजूद अब तक जिले में डेडिकेटेड ड्राइविंग ट्रैक नहीं बना है। भारी वाहन मसलन ट्रक, बस, जेसीबी, हाईवा आदि चलाने का लाइसेंस लेने के लिए आवेदन से पहले अभ्यर्थी को ड्राइविंग सेंटर में प्रशिक्षण लेने के बाद प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता होती है।
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जिले में परिवहन विभाग की ओर से हर वर्ष लगभग 15 हजार ड्राइविंग लाइसेंस जारी किये जाते हैं। इनमें 600 के करीब लाइसेंस भारी वाहनों को चलाने के लिए जारी होते हैं। शेष लाइसेंस निजी चार पहिया और दो पहिया वाहनों के अलावा ऑटो, ई-रिक्शा आदि के लिए जारी होते हैं। जिले में पांच वाहन ट्रेनिंग सेंटर हैं। जो कि परिवहन विभाग के मुख्यालय से अप्रूव्ड है।
दो चरणों में बनता है लाइसेंस
पीडीडीयू नगर। वाहन चलाने के लिए दो चरणों में ड्राइविंग लाइसेंस बनता है। इसमें ऑनलाइन आवेदन के बाद पहले चरण में लर्निंग लाइसेंस बनता है। इसके लिए टेस्ट का प्रावधान है। वहीं इसके आधार पर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना और टेस्ट देना पड़ता है। संवाद
शीघ्र ही जिले में बनेगा एडीटीआई
जिले में लाइसेंस देने से पहले सड़क पर वाहन चलवाकर टेस्ट लेने की को मुकअम्मल व्यवस्था नहीं होने से काफी परेशानी होती है। जिले में शीघ्र ही एडीटीआई (ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) बनेगा। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने के बाद एडीटीआई में जाकर परीक्षा पास करनी होगी। वहां सब कुछ सेंसर पर आधारित होगा।
कुल मिलाकर सेंसर आधिरित ट्रैक पर वाहन चलाने के बाद ही लाइसेंस मिल सकेगा। यह सेंटर पीपीपी की तर्ज पर बनेगा। दस लाख की आबादी पर एक सेंटर का निर्माण किया जाना है। जिले में फिलहाल एक सेंटर की अनुमति मिल गई है। इसके लिए जमीन भी चिन्हित हो गई है।




जिले में ड्राइविंग ट्रैक नहीं होने के कारण टेक्किनल रूप से परेशानी आती है। सर्विस लेन पर चार पहिया वाहनों के लाइसेंस का टेस्ट होता है वहीं भारी वाहनों को लाइसेंस जारी करने के पहले उन्हें शासन से अप्रूव्ड वाहन ट्रेनिंग सेंटर से प्रमाण पत्र लेना आवश्यक है। जिले में ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनने से यह समस्या समाप्त हो जाएगी। - डॉ. सर्वेश गौतम, एआरटीओ प्रशासन, चंदौली
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