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एक साथ उठी तीन की अर्थी, मचा कोहराम

Wed, 04 Mar 2020 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2020 12:30 AM IST
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The meaning of three arose together, created chaos
मुरलीपुर में एक ही घर के तीन लोगों के दाह संस्कार के बाद शोकाकुल परिवार के लोग। - फोटो : CHANDAULI
कमालपुर। धीना थाना अंतर्गत महुुंजी गांव के समीप गंगा में डूब कर मृत लोगों के शवों को सोमवार की रात अंतिम संस्कार किया गया। मुरलीपुर के एक ही परिवार के तीन मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार वीरासराय घाट पर किया गया। दादी संग दो पौत्री के शवों को जल में प्रवाहित किया गया। इसके पहले गांव से तीन अर्थियां एक साथ उठने से पूरे गांव में कोहराम की स्थिति रही। यही हालत महुजी गांव की भी रही। घटना में मृत उर्मिला के शव को महुजी घाट पर ही जल में प्रवाहित किया गया। शनिवार को महिलाओं से भरी नाव महुंजी गांव के सामने पलटने से पांच लोगों की मौत हो गई। रविवार को कुसुम्ही निवासी लाल साहब की बेटी ज्योति (14) का शव गंगा से एनडीआरएफ के जवानों ने निकाला। सोमवार को ग्रामीणों ने भी प्रयास शुरू किया तो शाम चार बजे तक लापता चार अन्य लोगों के शव बरामद हो गए। मृतकों में महिला और दो किशोरियां मुरलीपुर की एक ही परिवार के रहे। महिला फूलबासी (60) पत्नी स्वर्गीय दूधनाथ और उसकी दो पौत्री कविता (15) पुत्री सजनू और ज्योति (10) पुत्री वीरेन्द्र के शवों को पोस्टमार्टम के बाद रात 11 बजे परिवार वालों को सौंप दिया गया। शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम की स्थिति हो गई। सजनू और वीरेन्द्र अपनी बेटियों और मां के शव को एक साथ देखकर मानो होश गंवा बैठे थे। परिवार वालों को सांत्वना देने के लिए पूरा गांव एकत्र था लेकिन करुण क्रंदन सुनकर सभी समीप जाने से ठिठक जा रहे थे। बाद में दादी और पौत्रियों की शवयात्रा एक साथ निकली तो पूरा गांव अपने आंसू नहीं रोक पाया। बाद में तीनों शवों को वीरासराय गंगा घाट पर जल में प्रवाहित किया गया। दूसरी तरफ घटना में मृत उर्मिला का शव पोस्टमार्टम के बाद गांव में पहुंचा तो दिल में दबा गम का गुबार फूट पड़ा और परिवार वालों का रो रोकर हाल बेहाल हो गया। रात में ही कांपते हाथों से पति जंगबहादुर ने कांपते हाथों से पत्नी उर्मिला की मांग में अंतिम बार सिंदूरदान किया। समीप बैठे छोटे बच्चे मां के शव को निहार रहे थे। बाद में शवयात्रा निकाल कर महुंजी घाट पर उर्मिला के मृत शरीर को मां गंगा के सुपुर्द कर दिया गया।
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