दुलहीपुर। साधु-फकीर का जीवन बहते हुए जल के समान होता है, जो परिस्थितियों के अनुसार बदलता है, परंतु मूल रूप में जल ही रहता है। साधु सदा अपने भक्तों के मंगलमय जीवन की कामना करता है। सच्चा गुरु पाखंड की दीवार तोड़कर सत्य और असत्य के बीच स्पष्ट अंतर का बोध कराता है।
ये बातें श्री सद्गुरु कबीर आनंद मठ, सीतापुर नई डांडी में गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर बुधवार को आयोजित गुरु पूर्णिमा उत्सव में महंत आनंद दास ने कहीं। कार्यक्रम में बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं। इस दौरान साहित्यकार डॉ. जयशंकर जय ने कहा कि त्याग और बलिदान भारतीय संस्कृति के मूल तत्व हैं। मानवता का उद्देश्य दूसरों की सच्चे मन से सहायता करना है। प्रेम, मानवता, वात्सल्य, सहयोग और सद्भावना को बढ़ाना गुरु का परम कर्तव्य है। संचालन सदानंद दास 'छोटू महाराज' तथा धन्यवाद ज्ञापन सुमन दास ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत ओमप्रकाश दास, गोपाल दास, रामनरेश, विजय बहादुर के नेतृत्व में कीर्तन मंडली द्वारा निर्गुण भजन से की गई। इस दौरान संत रमेश दास, संत दास, रविदास, गुरुचरण दास, सूरज दास, मनीष मार्कंडेय, संतोष आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन पर देर शाम भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।