{"_id":"6a5e7d6862be8bab0a0dae6d","slug":"sweeping-machine-did-not-come-out-for-cleaning-chandauli-news-c-189-1-svns1013-151721-2026-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandauli News: 25 महीने में 25 दिन भी सफाई के लिए नहीं निकली 25 लाख की स्वीपिंग मशीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandauli News: 25 महीने में 25 दिन भी सफाई के लिए नहीं निकली 25 लाख की स्वीपिंग मशीन
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर के शाहकुटी स्थित गोदाम में धूल फांक रहा स्वीपिंग मशीन। संवाद
पीडीडीयू नगर। नगर पालिका परिषद पीडीडीयू नगर की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर की सड़कों को आधुनिक तरीके से साफ करने के उद्देश्य से जून 2024 में करीब 25 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई स्वीपिंग मशीन अब खुद धूल और कबाड़ के बीच पड़ी हुई है। स्थिति यह है कि करीब 25 महीने बीत जाने के बाद भी यह मशीन 25 दिन भी नियमित रूप से सड़क पर सफाई करती नजर नहीं आई। वर्तमान में मशीन शाहकुटी स्थित नगर पालिका के गैराज में अन्य अनुपयोगी वाहनों और उपकरणों के बीच खड़ी है।
उड़ती धूल राहगीरों और दुकानदारों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई मशीन के उपयोग पर सवाल उठने लगे हैं। नगर पालिका ने सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में इस छोटी स्वीपिंग मशीन को खरीदा था। मशीन को नगर पालिका अध्यक्ष सोनू किन्नर ने हरी झंडी दिखाकर बेड़े में शामिल किया था। उस समय दावा किया गया था कि अब शहर की प्रमुख सड़कों, डिवाइडरों और बाजारों की नियमित मशीन से सफाई होगी, जिससे धूल और गंदगी से राहत मिलेगी।
हालांकि, हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। मशीन कम क्षमता की होने के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। यही वजह है कि इसे नियमित रूप से सड़क पर नहीं उतारा जाता। वर्तमान में मशीन गैराज में खड़ी है और उसके रखरखाव की भी समुचित व्यवस्था नहीं दिखाई देती। खुले में खड़ी मशीन धूप और बारिश की मार झेल रही है, जिससे उसके जल्द खराब होने की आशंका भी बढ़ गई है। नगर पालिका के पास वर्तमान में लगभग 200 हाथ ठेला गाड़ियां, 20 टिपर, दो जेसीबी, एक बैकोलोडर, दो ट्रैक्टर और दो हाइवा उपलब्ध हैं। इसके बावजूद आधुनिक सफाई मशीन का समुचित उपयोग नहीं हो पाना नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
विज्ञापन
14 वर्ष पहले खरीदी गई मशीन भी हुई थी कबाड़
यह पहला मौका नहीं है जब स्वीपिंग मशीन बेकार साबित हुई हो। लगभग 14 वर्ष पहले भी नगर पालिका ने एक बड़ी स्वीपिंग मशीन खरीदी थी। लेकिन रखरखाव के अभाव और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण वह पूरी तरह कबाड़ बन गई। बाद में उसके स्पेयर पार्ट्स तक उपलब्ध नहीं हो सके। उसी अनुभव से सबक लेने के बजाय एक बार फिर नई मशीन भी लगभग उसी रास्ते पर जाती दिखाई दे रही है। यदि आधुनिक मशीनों का उपयोग ही नहीं होना था तो लाखों रुपये खर्च करने का औचित्य क्या था। मशीन का नियमित संचालन हो तो मुख्य मार्गों पर जमी धूल से राहत मिल सकती है और सफाई व्यवस्था भी बेहतर होगी।
नगर पालिका के पास उपलब्ध सफाई संसाधन
-200 हाथ ठेला गाड़ियां
-20 टिपर वाहन
-2 जेसीबी
-1 बैकोलोडर
-2 ट्रैक्टर
-2 हाइवा
-1 छोटी स्वीपिंग मशीन (25 लाख रुपये लागत)
मुख्य सड़कों पर अब भी धूल की मोटी परत
नगर के कई प्रमुख मार्गों और डिवाइडरों के किनारे नियमित मशीन से सफाई नहीं होने के कारण धूल जमा रहती है। वाहन गुजरने पर धूल उड़ती है, जिससे राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
खरीद का समय: जून 2024
लागत: लगभग 25 लाख रुपये
उद्देश्य: मुख्य सड़कों और डिवाइडरों की मशीन से सफाई
वर्तमान स्थिति: शाहकुटी स्थित नगर पालिका गैराज में खड़ी
छोटी स्वीपिंग मशीन कम क्षमता की है। आवश्यकता होने पर उसे समय-समय पर सड़क पर उतारा जाता है और सड़क की सफाई में प्रयोग किया जाता है। - सोनू किन्नर, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद पीडीडीयू नगर
नगर पालिका ने 25 लाख रुपये खर्च कर मशीन तो खरीद ली, लेकिन उसका फायदा जनता को नहीं मिल रहा है। यह मशीन 25 दिन भी सफाई के लिए नहीं निकली होगी। मुख्य सड़क और डिवाइडर के किनारे रोज धूल उड़ती है। अगर मशीन नियमित चले तो सफाई व्यवस्था काफी बेहतर हो सकती है। -उत्तम जायसवाल, मैनाताली
-- बरसात के बाद सड़क सूखते ही धूल का गुबार उड़ने लगता है। पैदल चलना और बाइक से निकलना मुश्किल हो जाता है। जब नगर पालिका के पास आधुनिक स्वीपिंग मशीन मौजूद है तो उसका नियमित उपयोग होना चाहिए। मशीन गैराज में खड़ी रहने से नहीं, सड़क पर चलने से सफाई होगी। मशीन कभी दिखती ही नहीं।-दिलीप सिंह, रविनगर
विज्ञापन
उड़ती धूल राहगीरों और दुकानदारों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई मशीन के उपयोग पर सवाल उठने लगे हैं। नगर पालिका ने सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में इस छोटी स्वीपिंग मशीन को खरीदा था। मशीन को नगर पालिका अध्यक्ष सोनू किन्नर ने हरी झंडी दिखाकर बेड़े में शामिल किया था। उस समय दावा किया गया था कि अब शहर की प्रमुख सड़कों, डिवाइडरों और बाजारों की नियमित मशीन से सफाई होगी, जिससे धूल और गंदगी से राहत मिलेगी।
विज्ञापन
हालांकि, हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। मशीन कम क्षमता की होने के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। यही वजह है कि इसे नियमित रूप से सड़क पर नहीं उतारा जाता। वर्तमान में मशीन गैराज में खड़ी है और उसके रखरखाव की भी समुचित व्यवस्था नहीं दिखाई देती। खुले में खड़ी मशीन धूप और बारिश की मार झेल रही है, जिससे उसके जल्द खराब होने की आशंका भी बढ़ गई है। नगर पालिका के पास वर्तमान में लगभग 200 हाथ ठेला गाड़ियां, 20 टिपर, दो जेसीबी, एक बैकोलोडर, दो ट्रैक्टर और दो हाइवा उपलब्ध हैं। इसके बावजूद आधुनिक सफाई मशीन का समुचित उपयोग नहीं हो पाना नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
विज्ञापन
14 वर्ष पहले खरीदी गई मशीन भी हुई थी कबाड़
यह पहला मौका नहीं है जब स्वीपिंग मशीन बेकार साबित हुई हो। लगभग 14 वर्ष पहले भी नगर पालिका ने एक बड़ी स्वीपिंग मशीन खरीदी थी। लेकिन रखरखाव के अभाव और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण वह पूरी तरह कबाड़ बन गई। बाद में उसके स्पेयर पार्ट्स तक उपलब्ध नहीं हो सके। उसी अनुभव से सबक लेने के बजाय एक बार फिर नई मशीन भी लगभग उसी रास्ते पर जाती दिखाई दे रही है। यदि आधुनिक मशीनों का उपयोग ही नहीं होना था तो लाखों रुपये खर्च करने का औचित्य क्या था। मशीन का नियमित संचालन हो तो मुख्य मार्गों पर जमी धूल से राहत मिल सकती है और सफाई व्यवस्था भी बेहतर होगी।
नगर पालिका के पास उपलब्ध सफाई संसाधन
-200 हाथ ठेला गाड़ियां
-20 टिपर वाहन
-2 जेसीबी
-1 बैकोलोडर
-2 ट्रैक्टर
-2 हाइवा
-1 छोटी स्वीपिंग मशीन (25 लाख रुपये लागत)
मुख्य सड़कों पर अब भी धूल की मोटी परत
नगर के कई प्रमुख मार्गों और डिवाइडरों के किनारे नियमित मशीन से सफाई नहीं होने के कारण धूल जमा रहती है। वाहन गुजरने पर धूल उड़ती है, जिससे राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
खरीद का समय: जून 2024
लागत: लगभग 25 लाख रुपये
उद्देश्य: मुख्य सड़कों और डिवाइडरों की मशीन से सफाई
वर्तमान स्थिति: शाहकुटी स्थित नगर पालिका गैराज में खड़ी
छोटी स्वीपिंग मशीन कम क्षमता की है। आवश्यकता होने पर उसे समय-समय पर सड़क पर उतारा जाता है और सड़क की सफाई में प्रयोग किया जाता है। - सोनू किन्नर, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद पीडीडीयू नगर
नगर पालिका ने 25 लाख रुपये खर्च कर मशीन तो खरीद ली, लेकिन उसका फायदा जनता को नहीं मिल रहा है। यह मशीन 25 दिन भी सफाई के लिए नहीं निकली होगी। मुख्य सड़क और डिवाइडर के किनारे रोज धूल उड़ती है। अगर मशीन नियमित चले तो सफाई व्यवस्था काफी बेहतर हो सकती है। -उत्तम जायसवाल, मैनाताली