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जानलेवा है पोलियो, इलाज नहीं टीका ही एकमात्र बचाव
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चंदौली। सीएमओ डॉ.युगल किशोर राय ने बताया कि पोलियो की बीमारी संक्रमित भोजन, पानी, या हवा में मौजूद संक्रमित बूंदों को मुंह के जरिये अंदर लेने से फैलती है। पोलियो का वायरस तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को प्रभावित कर सकता है। पोलियो की वजह से लकवा हो सकता है और ज्यादा गंभीर हो तो यह जानलेवा भी हो सकता है। इसका एकमात्र इलाज है नियमित टीकाकरण।
सीएमओ डा. युगल किशोर राय ने कहा कि बच्चों को, खासकर पांच साल से कम उम्र वालों को यह बीमारी होने का सबसे ज्यादा खतरा होता है। पोलियो का कोई इलाज नहीं है, मगर पोलियो का टीका बच्चे का इस बीमारी से बचाव कर सकता है। पोलियोमाइलाइटिस, जिसे आमतौर पर पोलियो कहा जाता है, एक वायरल इनफेक्शन है जो कि पोलियोवायरस की वजह से होता है।कहा कि पोलियो बहुत ही संक्रामक बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से या फिर उनके छींकने या खांसने से हवा में फैली संक्रमित बूंदों को सांस के जरिये अंदर लेने से फैलता है। वायरस रक्तप्रवाह में पहुंच सकता है और तंत्रिका तंत्र में फैल सकता है, जहां यह मस्तिष्क और मेरूदंड के तंत्रिका उत्तकों पर हमला करता है। इससे अस्थाई रूप से लकवा हो सकता है और कई बार लकवे की स्थिति स्थाई भी हो सकती है। अगर इस वायरस का असर श्वसन मांसपेशियों पर हो जाए, तो पोलियो जानलेवा साबित हो सकता है।
चंदौली। पोलियो लोगों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है। गले में खराश,बुखार,पेट दर्द,सिर दर्द,मिचली, उल्टी थकान, मांसपेशियों में दर्द गर्दन, कमर या टांगों में अकड़नटांगों में झनझनाहट या चुभन की का अनुभव करना इसका प्रमुख लक्षण होता है। संवाद
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पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे ज्यादा प्रभावितचंदौली। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. संजय कुमार ने बताया कि पोलियो मुख्यत: पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। पोलियो का कोई इलाज नहीं है, मगर इसका टीका लगवाने से शिशु को इस इनफेक्शन से बचाया जा सकता है। बताया कि यह जरुरी नहीं है कि पोलियो इनफेक्शन से हमेशा ही ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हों जो जिंदगी भर रहें। अक्सर बच्चे बिना किसी दुष्प्रभाव के इससे उबर जाते हैं। मगर यदि इनफेक्शन ज्यादा गंभीर हो, तो इससे दीर्घकालीन अक्षमताएं हो सकती हैं, जैसे कि:स्थाई रूप से लकवा मां सपेशियों का सिकुड़ना या कमजोर होना,पैर या टांगे मुड़ जाना या जोड़ों में कसाव। संवाद
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सीएमओ डा. युगल किशोर राय ने कहा कि बच्चों को, खासकर पांच साल से कम उम्र वालों को यह बीमारी होने का सबसे ज्यादा खतरा होता है। पोलियो का कोई इलाज नहीं है, मगर पोलियो का टीका बच्चे का इस बीमारी से बचाव कर सकता है। पोलियोमाइलाइटिस, जिसे आमतौर पर पोलियो कहा जाता है, एक वायरल इनफेक्शन है जो कि पोलियोवायरस की वजह से होता है।कहा कि पोलियो बहुत ही संक्रामक बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से या फिर उनके छींकने या खांसने से हवा में फैली संक्रमित बूंदों को सांस के जरिये अंदर लेने से फैलता है। वायरस रक्तप्रवाह में पहुंच सकता है और तंत्रिका तंत्र में फैल सकता है, जहां यह मस्तिष्क और मेरूदंड के तंत्रिका उत्तकों पर हमला करता है। इससे अस्थाई रूप से लकवा हो सकता है और कई बार लकवे की स्थिति स्थाई भी हो सकती है। अगर इस वायरस का असर श्वसन मांसपेशियों पर हो जाए, तो पोलियो जानलेवा साबित हो सकता है।
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चंदौली। पोलियो लोगों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है। गले में खराश,बुखार,पेट दर्द,सिर दर्द,मिचली, उल्टी थकान, मांसपेशियों में दर्द गर्दन, कमर या टांगों में अकड़नटांगों में झनझनाहट या चुभन की का अनुभव करना इसका प्रमुख लक्षण होता है। संवाद
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पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे ज्यादा प्रभावितचंदौली। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. संजय कुमार ने बताया कि पोलियो मुख्यत: पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। पोलियो का कोई इलाज नहीं है, मगर इसका टीका लगवाने से शिशु को इस इनफेक्शन से बचाया जा सकता है। बताया कि यह जरुरी नहीं है कि पोलियो इनफेक्शन से हमेशा ही ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हों जो जिंदगी भर रहें। अक्सर बच्चे बिना किसी दुष्प्रभाव के इससे उबर जाते हैं। मगर यदि इनफेक्शन ज्यादा गंभीर हो, तो इससे दीर्घकालीन अक्षमताएं हो सकती हैं, जैसे कि:स्थाई रूप से लकवा मां सपेशियों का सिकुड़ना या कमजोर होना,पैर या टांगे मुड़ जाना या जोड़ों में कसाव। संवाद