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ओडिसी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा ने मोहा मन
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पीडीडीयू नगर। सनबीम स्कूल में स्पीक मैके संस्था के निर्देेश पर गुरुवार को ओडिसी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा ने साथी कलाकारों के साथ भावपूर्ण नृत्य से उपस्थित लोगों का मन मोहा। सुजाता महापात्रा ने विद्यार्थियों को आडिसी नृत्य की भव भंगिमाओं के बारे में जानकारी।
कार्यक्रम की शुरूआत विद्यालय परिवार और कलाकारों ने स्पीक मैके संस्था के अध्यक्ष एसपी सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित कर किया। नृत्य के पूर्व कलाकारों ने छात्र छात्राओं को मंगलाचरण, बटु, पल्लवी अभिनय तथा मोक्ष नृत्य शैलियों और उनकी बारीकियां समझाई गई। नृत्य के अंतर्गत भाव तथा मुद्राओं का विशेष स्थान होता है। यह बात भी छात्रों को कलाकारों से ज्ञात हुई। मंगलाचरण के तहत भगवान शिव की स्तुति के भाव को प्रदर्शित किया। इस दौरान सुजाता महापात्रा ने कलाकारों के साथ अभिनय के तहत मीन, कूर्म, भगवान राम, बलराम के भाव मुद्राओं को प्रदर्शित किया गया। भगवान विष्णु के वराह अवतार , वामन अवतार की कथा की प्रस्तुति भी की गई वहीं रामावतार में युद्धकौशल का मंचन भी किया गया। सुजाता महापात्रा ने विद्यार्थियों को एकाग्रता तथा चित्त की गंभीरता के विषय में समझाते हुए कहा कि नृत्य की भाव - भंगिमाओं की सही प्रस्तुति तभी संभव है जब हम अपनी मुद्राओं पर पूर्ण ध्यान केंद्रित रखें। उन्होंने आधुनिकता में प्राचीन परंपराओं को साथ लेकर चलने की प्रेरणा भी दी। कार्यक्रम का संचालन उप-प्रधानाचार्या स्मृति खन्ना की देख-रेख में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने किया।
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कार्यक्रम की शुरूआत विद्यालय परिवार और कलाकारों ने स्पीक मैके संस्था के अध्यक्ष एसपी सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित कर किया। नृत्य के पूर्व कलाकारों ने छात्र छात्राओं को मंगलाचरण, बटु, पल्लवी अभिनय तथा मोक्ष नृत्य शैलियों और उनकी बारीकियां समझाई गई। नृत्य के अंतर्गत भाव तथा मुद्राओं का विशेष स्थान होता है। यह बात भी छात्रों को कलाकारों से ज्ञात हुई। मंगलाचरण के तहत भगवान शिव की स्तुति के भाव को प्रदर्शित किया। इस दौरान सुजाता महापात्रा ने कलाकारों के साथ अभिनय के तहत मीन, कूर्म, भगवान राम, बलराम के भाव मुद्राओं को प्रदर्शित किया गया। भगवान विष्णु के वराह अवतार , वामन अवतार की कथा की प्रस्तुति भी की गई वहीं रामावतार में युद्धकौशल का मंचन भी किया गया। सुजाता महापात्रा ने विद्यार्थियों को एकाग्रता तथा चित्त की गंभीरता के विषय में समझाते हुए कहा कि नृत्य की भाव - भंगिमाओं की सही प्रस्तुति तभी संभव है जब हम अपनी मुद्राओं पर पूर्ण ध्यान केंद्रित रखें। उन्होंने आधुनिकता में प्राचीन परंपराओं को साथ लेकर चलने की प्रेरणा भी दी। कार्यक्रम का संचालन उप-प्रधानाचार्या स्मृति खन्ना की देख-रेख में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने किया।
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