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पोषण के प्रति जागरूकता से दूर होगा कुपोषण: सीडीपीओ
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चंदौली। पोषण अभियान को जन आंदोलन का रूप देने व गर्भवती को स्वस्थ व सुपोषित रखने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोदभराई, अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही गृह भ्रमण कर गर्भवती व धात्री माताओं तथा बच्चों व किशोर-किशोरियों को पोषण की जानकारी दी जा रही है।
बुधवार को बाल विकास परियोजना कार्यालय पर आयोजित गोष्ठी में सीडीपीओ राम प्रकाश मौर्य ने बताया कि कुपोषण को दूर करने के लिए जरूरी है कि गर्भवती न सिर्फ संतुलित आहार लें बल्कि स्वच्छता, समय से चिकित्सीय जांच और परिवार नियोजन के प्रति भी जागरूक हों। खाने में हरी सब्जियों में पालक, बथुआ, सोया, मेथी आदि से रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। खून की कमी (एनीमिया) भी दूर होती है। सीडीपीओ मौर्य ने बताया कि ब्लॉक में बरहनी परियोजना में पांच वर्ष तक के 20,395 बच्चे हैं। इसमें 20,365 बच्चों का वजन किया गया है। बरहनी परियोजना में 59 बच्चे अतिकुपोषित यानि लाल श्रेणी के हैं जबकि 328 बच्चे मध्यम कुपोषित यानि पीली श्रेणी और 19978 बच्चे सामान्य यानी हरी श्रेणी के हैं। ब्लॉक बरहनी आंगनबाड़ी केंद्र-मुहम्मदपुर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमन सिंह ने बताया कि एनीमिया, स्वच्छता एवं सफाई, पौष्टिक आहार तथा डायरिया निवारण से संबंधित कार्यक्रमों एवं योजनाओं के संबंध में गृह-भ्रमण के दौरान महिलाओं व परिवार के सदस्यों को जागरूक कर रही हैं। इसके साथ ही कोविड से बचाव के लिए दो गज दूरी, मास्क का प्रयोग करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कहा कि महिलाओं को खाना बनाते समय हाथ और बर्तन व घर साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। छह माह तक के शिशु के लिए स्तनपान तथा छह माह से दो वर्ष तक की आय़ु के बच्चों के लिए स्तनपान के साथ-साथ पूरक आहार की महत्ता, खून की कमी से होने वाली परेशानियों को दूर करने की जानकारी भी दी जा रही है। प्रतिदिन आहार में शामिल करने के लिए दाल, सोयाबीन, साबूत अनाज, विटामिन-सी युक्त मौसमी सब्जियां व नींबू, आंवला, संतरा, गाजर आदि के बारे में जागरूक कर रही हैं।
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बुधवार को बाल विकास परियोजना कार्यालय पर आयोजित गोष्ठी में सीडीपीओ राम प्रकाश मौर्य ने बताया कि कुपोषण को दूर करने के लिए जरूरी है कि गर्भवती न सिर्फ संतुलित आहार लें बल्कि स्वच्छता, समय से चिकित्सीय जांच और परिवार नियोजन के प्रति भी जागरूक हों। खाने में हरी सब्जियों में पालक, बथुआ, सोया, मेथी आदि से रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। खून की कमी (एनीमिया) भी दूर होती है। सीडीपीओ मौर्य ने बताया कि ब्लॉक में बरहनी परियोजना में पांच वर्ष तक के 20,395 बच्चे हैं। इसमें 20,365 बच्चों का वजन किया गया है। बरहनी परियोजना में 59 बच्चे अतिकुपोषित यानि लाल श्रेणी के हैं जबकि 328 बच्चे मध्यम कुपोषित यानि पीली श्रेणी और 19978 बच्चे सामान्य यानी हरी श्रेणी के हैं। ब्लॉक बरहनी आंगनबाड़ी केंद्र-मुहम्मदपुर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमन सिंह ने बताया कि एनीमिया, स्वच्छता एवं सफाई, पौष्टिक आहार तथा डायरिया निवारण से संबंधित कार्यक्रमों एवं योजनाओं के संबंध में गृह-भ्रमण के दौरान महिलाओं व परिवार के सदस्यों को जागरूक कर रही हैं। इसके साथ ही कोविड से बचाव के लिए दो गज दूरी, मास्क का प्रयोग करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कहा कि महिलाओं को खाना बनाते समय हाथ और बर्तन व घर साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। छह माह तक के शिशु के लिए स्तनपान तथा छह माह से दो वर्ष तक की आय़ु के बच्चों के लिए स्तनपान के साथ-साथ पूरक आहार की महत्ता, खून की कमी से होने वाली परेशानियों को दूर करने की जानकारी भी दी जा रही है। प्रतिदिन आहार में शामिल करने के लिए दाल, सोयाबीन, साबूत अनाज, विटामिन-सी युक्त मौसमी सब्जियां व नींबू, आंवला, संतरा, गाजर आदि के बारे में जागरूक कर रही हैं।
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