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Chandauli News: एक साल में दिल और दिमाग के नौ हजार मरीज रेफर, 27 साल से नहीं हैं डॉक्टर
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चंदौली। जनपद में दो संयुक्त जिला अस्पताल हैं लेकिन दोनों जगह दिल, दिमाग और गुर्दा के मरीजों का इलाज नहीं होता। 27 वर्षों से दोनों अस्पतालों में कार्डियो, न्यूरो और नेफ्रो के डॉक्टर नहीं हैं। एक वर्ष में इन रोगों से संबंधित नौ हजार मरीज रेफर किए जा चुके हैं। ऐसे में दोनों जिला अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं।
वाराणसी से अलग होने के बाद अभी तक जिले की स्वास्थ्य विभाग अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सका है। चंदौली और चकिया में संयुक्त जिला अस्पताल तो खोले गए लेकिन दोनों जगह अब तक न्यूरो, कॉर्डियो, नेफ्रो और यूरोलॉजी के डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे दिल, दिमाग और गुर्दा के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पिछले साल करीब 18000 हजार मरीज आए थे। इनमें 9000 हजार मरीज न्यूरो, कॉर्डियो, यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी के थे, जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण रेफर कर दिया गया।
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जनपद वासियों को जल्द मिलेंगे यूरो, न्यूरो और कार्डियोलॉजी के चिकित्सक
चंदौली। चंदौली जनपद के सृजन हुए लगभग 27 साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक जनपद में न्यूरोलाजी, यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजिस्ट के चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पाई है। वहीं मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही ऐसे चिकित्सकों की तैनाती हो जाएगी। चिकित्सा विभाग के दावा है कि जल्द ही चिकित्सकों के तैनाती हो जाएगी। जिससे जनपद वासियों के साथ-साथ गैर जनपद और अन्य प्रदेश के लोगों को भी लाभ मिलेगा।
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मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर भी दे रहें सेवाएं
चंदौली। बाबा कीनाराम स्वशासीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला अस्पताल कुछ हद तक डॉक्टरों की कमी दूर हुई है। अस्पताल में 24 चिकित्सक तैनात हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज के 18 प्रोफेसर, 16 सीनियर रेजिडेंट और 38 जूनियर रेजिडेंट भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि कई विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी अभी बरकरार है।
कोट
यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी में डॉक्टरों की तैनाती के लिए प्रयास चल रहा है। उम्मीद है कि शासन की ओर से जैसे जल्द ही इन विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। - डॉ. अमित कुमार सिंह, प्राचार्य, बाबा कीनाराम स्वशासी मेडिकल कॉलेज, चंदौली
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वाराणसी से अलग होने के बाद अभी तक जिले की स्वास्थ्य विभाग अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सका है। चंदौली और चकिया में संयुक्त जिला अस्पताल तो खोले गए लेकिन दोनों जगह अब तक न्यूरो, कॉर्डियो, नेफ्रो और यूरोलॉजी के डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे दिल, दिमाग और गुर्दा के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पिछले साल करीब 18000 हजार मरीज आए थे। इनमें 9000 हजार मरीज न्यूरो, कॉर्डियो, यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी के थे, जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण रेफर कर दिया गया।
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जनपद वासियों को जल्द मिलेंगे यूरो, न्यूरो और कार्डियोलॉजी के चिकित्सक
चंदौली। चंदौली जनपद के सृजन हुए लगभग 27 साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक जनपद में न्यूरोलाजी, यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजिस्ट के चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पाई है। वहीं मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही ऐसे चिकित्सकों की तैनाती हो जाएगी। चिकित्सा विभाग के दावा है कि जल्द ही चिकित्सकों के तैनाती हो जाएगी। जिससे जनपद वासियों के साथ-साथ गैर जनपद और अन्य प्रदेश के लोगों को भी लाभ मिलेगा।
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मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर भी दे रहें सेवाएं
चंदौली। बाबा कीनाराम स्वशासीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला अस्पताल कुछ हद तक डॉक्टरों की कमी दूर हुई है। अस्पताल में 24 चिकित्सक तैनात हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज के 18 प्रोफेसर, 16 सीनियर रेजिडेंट और 38 जूनियर रेजिडेंट भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि कई विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी अभी बरकरार है।
कोट
यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी में डॉक्टरों की तैनाती के लिए प्रयास चल रहा है। उम्मीद है कि शासन की ओर से जैसे जल्द ही इन विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। - डॉ. अमित कुमार सिंह, प्राचार्य, बाबा कीनाराम स्वशासी मेडिकल कॉलेज, चंदौली