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Chandauli News: नगर पालिका इंटर कॉलेज के प्रयोगशाला में 35 वर्षों से रखा है नौ महीने का मृत बच्चा
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जमुना दयाल
चंदौली। पीडीडीयू नगर स्थित 60 साल पुराने नगर पालिका इंटर कॉलेज का जीव विज्ञान प्रयोगशाला किसी संग्रहालय से कम नहीं है। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए 30 साल पुराने नौ माह का एक मृत बच्चा सहित 200 से अधिक जीवों और वनस्पतियों को एक खास रासायनिक तरल पदार्थ में सुरक्षित रखा गया है। विद्यालय प्रबंधन का दावा है कि पूरे जिले में ही नहीं प्रदेश भर के किसी भी सरकारी विद्यालयों के इस तरह का प्रयोगशाला नहीं है।
प्रयोगशाला प्रभारी फूलचंद सिंह यादव ने बताया कि वर्ष 1993 में नगर पालिका परिसर में मौजूद जच्चा- बच्चा केंद्र से अज्ञात महिला के नौ माह के मृत बच्चे को पहली बार केंद्र प्रभारी उर्मीला मिश्रा की मदद से लाया गया था। जिसे फॉर्मेल्डिहाइड तरल में कांच के बर्तन में रखा गया है। जिसका प्रयोग यहां पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा यहां सूकर, बकरी के भ्रुण, सांप सहित कई पानी में रहने जीव और वनस्पति रखे गए हैं।
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हर साल प्रशिक्षित होते है 60 से 70 बच्चे, बनते है डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ
हर साल विद्यालय में पढ़ने वाले 12वीं के छात्र यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद जिले चिकित्सक या पैरामेडिकल स्टाफ बनते है। बीते सत्रों में अब सैकड़ों बच्चे चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ के तौर शहर कई निजी और सरकारी अस्पतालों में तैनात है। इनमें पटना में होम्योपैथ से एमडी की पढाई कर रहे अखिलेश कनौजिया, पैरामेडिकल स्टाफ विद्याशंकर उपाध्याय का नाम मुख्य है।
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प्रयोगशाला में तीन से छह माह के 30 साल पुराने भ्रूण के अलावा बकरी, सूकर, उड़ने वाली छिपकली, बच्चे देने वाली मछली, स्टार फिस, हार्स फिस, मानव कंकाल, खोपड़ी, करंट माने वाली मछली, कछुआ, चमगादड़ सहित कई दुर्लभ प्रजाति के पौधों को सुरक्षित रखा गया है।
प्रयोगशाला के प्रभारी ने बताया कि प्रयोगशाला में विद्यार्थियों को शिक्षित करने के लिए अध्यापक, उपकरण, जीव और वनस्पति मौजूद है लेकिन यहां लैब तकनीशियन है जो जिले के लगभग सभी विद्यालयों का यही हाल। लैब तकनीशियन के न होने से उपकरणों के प्रयोग के बाद देखरेख न होने खराब और टूटने का खतरा बना रहता है। प्रयोगशाला में 70 की संख्या में माइक्रोस्कोप है।
जिले में ही नहीं पूरे प्रदेश में इस तरह की प्रयोगशाला नहीं जहां तीन माह से नौ माह तक के मानव भ्रूण सहित कई जीव-जन्तु और वनस्पतियों को रखा गया। इसका लाख यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिल रहा है। - डॉ. महेंद्र कुमार पांडेय, प्रधानाचार्य
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चंदौली। पीडीडीयू नगर स्थित 60 साल पुराने नगर पालिका इंटर कॉलेज का जीव विज्ञान प्रयोगशाला किसी संग्रहालय से कम नहीं है। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए 30 साल पुराने नौ माह का एक मृत बच्चा सहित 200 से अधिक जीवों और वनस्पतियों को एक खास रासायनिक तरल पदार्थ में सुरक्षित रखा गया है। विद्यालय प्रबंधन का दावा है कि पूरे जिले में ही नहीं प्रदेश भर के किसी भी सरकारी विद्यालयों के इस तरह का प्रयोगशाला नहीं है।
प्रयोगशाला प्रभारी फूलचंद सिंह यादव ने बताया कि वर्ष 1993 में नगर पालिका परिसर में मौजूद जच्चा- बच्चा केंद्र से अज्ञात महिला के नौ माह के मृत बच्चे को पहली बार केंद्र प्रभारी उर्मीला मिश्रा की मदद से लाया गया था। जिसे फॉर्मेल्डिहाइड तरल में कांच के बर्तन में रखा गया है। जिसका प्रयोग यहां पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा यहां सूकर, बकरी के भ्रुण, सांप सहित कई पानी में रहने जीव और वनस्पति रखे गए हैं।
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हर साल प्रशिक्षित होते है 60 से 70 बच्चे, बनते है डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ
हर साल विद्यालय में पढ़ने वाले 12वीं के छात्र यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद जिले चिकित्सक या पैरामेडिकल स्टाफ बनते है। बीते सत्रों में अब सैकड़ों बच्चे चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ के तौर शहर कई निजी और सरकारी अस्पतालों में तैनात है। इनमें पटना में होम्योपैथ से एमडी की पढाई कर रहे अखिलेश कनौजिया, पैरामेडिकल स्टाफ विद्याशंकर उपाध्याय का नाम मुख्य है।
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प्रयोगशाला में तीन से छह माह के 30 साल पुराने भ्रूण के अलावा बकरी, सूकर, उड़ने वाली छिपकली, बच्चे देने वाली मछली, स्टार फिस, हार्स फिस, मानव कंकाल, खोपड़ी, करंट माने वाली मछली, कछुआ, चमगादड़ सहित कई दुर्लभ प्रजाति के पौधों को सुरक्षित रखा गया है।
प्रयोगशाला के प्रभारी ने बताया कि प्रयोगशाला में विद्यार्थियों को शिक्षित करने के लिए अध्यापक, उपकरण, जीव और वनस्पति मौजूद है लेकिन यहां लैब तकनीशियन है जो जिले के लगभग सभी विद्यालयों का यही हाल। लैब तकनीशियन के न होने से उपकरणों के प्रयोग के बाद देखरेख न होने खराब और टूटने का खतरा बना रहता है। प्रयोगशाला में 70 की संख्या में माइक्रोस्कोप है।
जिले में ही नहीं पूरे प्रदेश में इस तरह की प्रयोगशाला नहीं जहां तीन माह से नौ माह तक के मानव भ्रूण सहित कई जीव-जन्तु और वनस्पतियों को रखा गया। इसका लाख यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिल रहा है। - डॉ. महेंद्र कुमार पांडेय, प्रधानाचार्य