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प्रतिदिन श्रमिक लेकर आते हैं 50 से अधिक ट्रक

Thu, 21 May 2020 10:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2020 10:33 PM IST
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More than 50 trucks bring workers every da
पीडीडीयू नगर। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या दो गोधना चौराहा से चंदौली नगर और नौबतपुर तक प्रवासी मजदूूरों का अस्थाई ठिकाना बन गया है। प्रतिदिन पचास से अधिक ट्रकों पर प्रवासी श्रमिक आते हैं और यहां उतरते हैं। इसके बाद श्रमिक पैदल ही आगे के लिए रवाना होते हैं। इस ठहराव में श्रमिकों की बेबसी, ट्रक चालकों की कुटिलता के साथ पुलिस लापरवाही, मानवाधिकारों की रक्षा का दंभ भरने वाली संस्थाओं और स्वयं सेवी संगठनों की आंख फेरने वाली प्रवृत्ति एक साथ दिख रही है। कुल मिलाकर इसमें मजदूर पिस रहे हैं।
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कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से देश में लागू लॉक डाउन के बाद औद्योगिक शहरों में फंसे मजदूरों के सामने भुखमरी की स्थिति हो गई। मजबूर होकर श्रमिक घरों के लिए पलायन कर रहे हैं। मजदूरों की मजबूरी का फायदा दलाल किस्म के लोग उठा रहे हैं। मुंबई, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा सहित अन्य राज्यों से दलाल श्रमिकों को ट्रकों के माध्यम से उनके घरों के लिए भेज रहे हैं। लेकिन ट्रक चालक श्रमिकों को बिहार ना ले जाकर पीडीडीयू नगर में ही उतार देते हैं । बेबस मजदूर यहां से किसी दूसरे वाहन अथवा पैदल ही घरों के लिए रवाना हो रहे हैं। मजदूरों की माने तो औद्योगिक शहरों में फंसकर बेबस हुए प्रवासी श्रमिक दलाल किस्म के लोगों के लिए बड़ा व्यापार बन गए हैं। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, गुजरात, चेन्नई सहित विभिन्न महानगरों में फंसे मजदूूरों को ट्रकों से उनके गांव भेजने का लालच दिया जा रहा है। मजदूरों से तीन से पांच हजार रुपये वसूले जा रहे हैं और एक ट्रक में 40 से 50 मजदूूरों को सवार किया जा रहा है और उन्हें बिहार के विभिन्न जिलों में घर तक पहुंचाने के बजाए पं. दीनदयाल उपाध्याय के समीप हाइवे पर उतार दिया जा रहा है। लाचार मजदूर न इधर के र रह हैं और न उधर के। मजबूरी में वे पैदल ही घर के लिए रवाना हो रहे हैं। गाजीपुर के जमानियां निवासी और पिछले दस वर्षों से चेन्नई के एक होटल में काम करने वाले रामप्रवेश ने बताया कि काम बंद होने पर वे किसी तरह घर के लिए चले। वह किसी तरह दिल्ली के बार्डर तक पहुंच गया। यहां तीन हजार देकर ट्रक पर सवार हुआ लेकिन चालक ने चंदौली में वाहन रोक दिया। अब आगे कैसे जाएं, इसका पता नहीं। इसी तरह गाजीपुर के जमानियां दयालपुर निवासी अजय कुमार ने बताया कि वह चेन्नई में मेट्रो का काम कर रही कंपनी में रसोइया का काम कर रहा था। वह पांच हजार रुपये देकर ट्रक से घर के लिए चला लेकिन बीच रास्ते में चालक ने उतार दिया।
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