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Malini Awasthi: मालिनी अवस्थी ने कहा- लोकगीत केवल स्वर नहीं, यह पीढ़ियों का अनुभव और समाज की आत्मा हैं

Sat, 19 Jul 2025 08:58 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली।
अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 19 Jul 2025 08:58 PM IST
सार

राजदरी में चल रही चार दिवसीय कार्यशाला में तीसरे दिन लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने गूढ़ प्रशिक्षण दिया। वहीं उन्होंने कहा कि लोकगीत केवल स्वर नहीं, यह पीढ़ियों का अनुभव और समाज की आत्मा हैं।

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Malini Awasthi said- Folk songs not just voices they experience of generations and soul of society
मालिनी अवस्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंदौली के सुरम्य वनांचल राजदरी रिसॉर्ट में आयोजित ‘रिमझिम बरसे बदरिया: कजरी पर केंद्रित’ चार दिवसीय लोकसंगीत कार्यशाला के तीसरे दिन भारत की प्रख्यात लोकगायिका व पद्मश्री सम्मानित मालिनी अवस्थी ने प्रतिभागियों को लोकसंगीत की बारीकियों से अवगत कराया।

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कार्यशाला का आयोजन भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया है। कार्यशाला में भाग लेने के लिए दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, प्रयागराज, बक्सर, छतरपुर, गोंडा, कोलकाता सहित देश के कोने-कोने से 50 से अधिक छात्र-छात्राएं और महिलाएं चंदौली पहुंचीं हैं। तीसरे दिन की कक्षाओं में प्रतिभागियों ने न केवल कजरी गायन की तकनीकी की सीख प्राप्त की, बल्कि गीतों के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को भी समझा। 
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मालिनी अवस्थी ने कहा कि लोकगीत केवल स्वर नहीं होती, ये पीढ़ियों का अनुभव और समाज की आत्मा होती हैं। इन्हें गाना नहीं, जीना पड़ता है। उन्होंने भोजपुरी, अवधी और ब्रज लोकगीतों की गूढ़ता को विस्तार से समझाया और स्वयं गायन कर प्रशिक्षणार्थियों को लय, भाव और प्रस्तुति की गहराई का परिचय कराया। उन्होंने यह भी बताया कि लोकगीत जनमानस की पीड़ा, प्रेम, श्रम और उल्लास को संजोते हैं और इसलिए इनकी प्रस्तुति पूरी निष्ठा से होनी चाहिए।         
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मालिनी अवस्थी ने बताया कि उनका बचपन पास के जनपद मिर्जापुर में बीता है और मां विंध्यवासिनी को वह अपनी कुलदेवी मानती हैं। जब भी मन प्रकृति की ओर भागता है, चंदौली के वनांचल में आ जाती हूं। यहां की चिड़ियों की चहचहाहट, हरियाली और वातावरण मुझे आत्मिक शांति देते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी उन्होंने यहां कजरी गीतों की प्रस्तुति दी थी, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। इस वर्ष भी वह चंद्रप्रभा अभ्यारण की वादियों में प्रशिक्षण दे रही हैं ताकि लोकगीतों को मंच से पहले मिट्टी से जोड़कर भावनात्मक गहराई दी जा सके। कार्यशाला में हिस्सा ले रहे युवा प्रशिक्षुओं ने मालिनी अवस्थी से मिलकर प्रसन्नता जाहिर की। 

एक प्रतिभागी ने कहा मालिनी जी से सीखना किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने यह समझाया कि लोकसंगीत केवल कला नहीं, जीवन की धड़कन है। मालिनी अवस्थी ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य सिर्फ गायन सिखाना नहीं, बल्कि लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत को संरक्षित कर नई पीढ़ी को मंच तक पहुंचाने का रास्ता बनाना है। जितना सुकून प्रकृति के पास बैठकर कजरी गाने में है, उतना बड़े मंचों पर भी नहीं मिलता।

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