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जवानों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के प्रति किया जागरूक

Sat, 20 Jun 2020 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2020 11:51 PM IST
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Jawans made aware of prevention of corona virus infection
पीडीडीयू नगर। रेलवे सुरक्षा बल की ओर से आरपीएफ कॉलोनी स्थित सीएंडटी बैरेक (रिजर्व पुलिस लाइन) के मनोरंजन सभागार में सुरक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्र ने जवानों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक किया। वहीं आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. असलम खान ने जवानों को इम्युनिटी बढ़ाने के तरीके बताए।
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सम्मेलन में वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्र ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण जिस तेजी फैल रहा है। उससे बचाव के लिए हम सबको अतिरिक्त मेहनत करनी होगी। आरपीएफ के जवान रेलवे स्टेशन और यार्ड सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे हैं। ऐसे में हम सबको अधिक सुरक्षित रहने की जरूरत है। सुरक्षा उपकरणों के साथ मास्क और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए हम सभी को काम में जुटने की जरूरत है। यही नहीं स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हुए इम्यूनिटी बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत है। आयुर्वेदिक डॉ. असलम खान ने गोष्ठी में जवानों को खान पान में सुधार और आयुर्वेदिक दवाओं के माध्यम से इम्यूनिटी पावर बढ़ाने पर जोर दिया। कहा कि इससे बहुत हद तक कोरोना से बचाव हो सकता है। इसके पूर्व उत्तर प्रदेश पत्रकार परिषद के अध्यक्ष संजय कुमार और नई रोशनी सेवा संमिति की ओर से रेसुब के कोरोना वारियर्स के रूप में कमांडेंट को सम्मानित किया। इस अवसर पर निरीक्षक डीडीयू संजीव कुमार, निरीक्षक यार्ड पोस्ट शमी अख्तर खान, निरीक्षक मानसनगर पीएनएस संजय कुमार सहित अन्य रहे।
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पीडीडीयू नगर। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते देश में लागू लॉकडाउन के दौरान कल कारखाने बंद होने से औद्योगिक शहरों से श्रमिक घरों को वापस लौटे। प्रवासी श्रमिकों का वापस लौटना खबरों की सुर्खियां बनी। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन को लेकर भी खूब राजनीति हुई लेकिन देश के अनलॉक होते ही श्रमिक एक बार फिर काम पर वापस लौटने लगे हैं। इसका प्रमाण स्थानीय रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर उमड़ने वाली भीड़ को देखकर मिल रहा है।
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कोरोना वायरस संक्रमण के चलते 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लागू हो गया। इसके साथ ही कल कारखाने आदि बंद हो गए। इससे दिल्ली, मुंबई, सूरत, चेन्नई, बंगलूरू सहित विभिन्न औद्योगिक शहरों से श्रमिक वापस लौट आए। बड़ी संख्या में श्रमिक पैदल ही घरों की ओर लौटे। यही नहीं एक मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से श्रमिक वापस लौटे। प्रदेेश सरकार ने प्रवासी श्रमिकों को प्रदेेश में ही रोजगार देने की बात कही। मनरेगा के तहत रोजगार दिया भी गया। हालांकि फैक्टरियों में श्रमिकों को जिस हिसाब से वेतन मिल रहा था। उतना वेतन गांव में नहीं मिल रहा है। ऐसे में श्रमिक अब वापस भी लौटने लगे हैं। कुछ श्रमिकों ने बताया कि गांवों में काम नहीं है और मजदूरी के भुगतान की दर शहरों की तुलना में गावों में बहुत कम है। यही नहीं मजदूरों के अभाव में बंद कंपनियों के मालिक अधिक वेतन देने का वादा कर श्रमिकों को शहरों में बुला रहे है। इसी वजह से वे रिजर्वेशन कराने पहुंच रहे हैं।
रिपोर्ट और संपादन- कृष्ण मुरारी मिश्र
बाइट-2700
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