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अप्रैल में आसमान से बरस रही आग, मई-जून का हो रहा अहसास
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पीडीडीयू नगर/शिकारगंज। अप्रैल माह में मई-जून जैसी गर्मी पड़ने के कारण शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक लोग परेशान हैं। अप्रैल में ही तापमान कई वर्षों का रिकार्ड तोड़कर 43 डिग्री पार कर गया है। इसके अलावा अब लू भी चलने लगी है।
इन दिनों गेहूं की कटाई चल रही है। लोगों का कहना है कि अप्रैल में तापमान इतना ज्यादा नहीं होता था। गांव में बच्चे व बुजुर्ग और खेती किसानी करने वाले लोग चिलचिलाती धूप और गर्मी से बेहाल हैं। लोग घर से बाहर बरामदे में या पेड़ों की छाया में शीतलता ढूंढ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में गेहूं की कटाई को लेकर बिजली आपूर्ति भी दिनभर बंद रहती है। धूप से दोपहर में सड़कें सुनसान हो जा रही हैं। चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. आरआर यादव ने बताया कि धूप से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना अनिवार्य है। लोग ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करें। प्रतिदिन पांच से छह लीटर पानी के साथ ही नींबू, चीनी व नमक काघोल बनाकर सेवन पिएं जिससे लू से बचा जा सके।
चकिया। गर्मी बढ़ने के साथ ही नगर में ठंडे पेय पदार्थों की दुकानें सज गई हैं। इन दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगने लगी है। आम, सत्तू, बेल व नींबू के शरबत की मांग सबसे ज्यादा है। वहीं खीरा, ककड़ी, तरबूज व खरबूज की मांग भी बढ़ गई है।
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मांग बढ़ने के साथ खीरा, ककड़ी, खरबूज व तरबूज के भाव आसमान छू रहे हैं। वही नींबू और कच्चे आम का दाम भी काफी बढ़ा हुआ है। नगर में ठेले पर शरबत बेचने वाले धीरेहूं गांव निवासी भरत मौर्य व तिलौरी गांव निवासी मनोज कचहरी मुंसिफ कोर्ट के पास दिन में व शाम को गांधी पार्क तिराहे में ठेले पर दुकान लगाते हैं। जहां ठंडे पेय पदार्थों के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। उनकी दुकान पर सत्तू की लस्सी 20 रुपए, नींबू का शरबत 15, बेल का शरबत 15 रुपये प्रति गिलास बिक रहा है। वहीं नींबू सोडा चीनी युक्त शरबत 20 व आम का पन्ना 15 रुपये में बिक रहा है। जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि केमिकलयुक्त रंगों से बने शरबत पीने से लोग बचें। सिर्फ प्राकृतिक फलों व नींबू के शरबत और सत्तू लोगों को राहत दे सकते हैं।
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इन दिनों गेहूं की कटाई चल रही है। लोगों का कहना है कि अप्रैल में तापमान इतना ज्यादा नहीं होता था। गांव में बच्चे व बुजुर्ग और खेती किसानी करने वाले लोग चिलचिलाती धूप और गर्मी से बेहाल हैं। लोग घर से बाहर बरामदे में या पेड़ों की छाया में शीतलता ढूंढ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में गेहूं की कटाई को लेकर बिजली आपूर्ति भी दिनभर बंद रहती है। धूप से दोपहर में सड़कें सुनसान हो जा रही हैं। चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. आरआर यादव ने बताया कि धूप से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना अनिवार्य है। लोग ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करें। प्रतिदिन पांच से छह लीटर पानी के साथ ही नींबू, चीनी व नमक काघोल बनाकर सेवन पिएं जिससे लू से बचा जा सके।
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चकिया। गर्मी बढ़ने के साथ ही नगर में ठंडे पेय पदार्थों की दुकानें सज गई हैं। इन दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगने लगी है। आम, सत्तू, बेल व नींबू के शरबत की मांग सबसे ज्यादा है। वहीं खीरा, ककड़ी, तरबूज व खरबूज की मांग भी बढ़ गई है।
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मांग बढ़ने के साथ खीरा, ककड़ी, खरबूज व तरबूज के भाव आसमान छू रहे हैं। वही नींबू और कच्चे आम का दाम भी काफी बढ़ा हुआ है। नगर में ठेले पर शरबत बेचने वाले धीरेहूं गांव निवासी भरत मौर्य व तिलौरी गांव निवासी मनोज कचहरी मुंसिफ कोर्ट के पास दिन में व शाम को गांधी पार्क तिराहे में ठेले पर दुकान लगाते हैं। जहां ठंडे पेय पदार्थों के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। उनकी दुकान पर सत्तू की लस्सी 20 रुपए, नींबू का शरबत 15, बेल का शरबत 15 रुपये प्रति गिलास बिक रहा है। वहीं नींबू सोडा चीनी युक्त शरबत 20 व आम का पन्ना 15 रुपये में बिक रहा है। जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि केमिकलयुक्त रंगों से बने शरबत पीने से लोग बचें। सिर्फ प्राकृतिक फलों व नींबू के शरबत और सत्तू लोगों को राहत दे सकते हैं।