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शिक्षक हूं, शिक्षक होने का कर्तव्य निभाता हूं

Sun, 05 Sep 2021 07:14 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 07:14 PM IST
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I am a teacher, do the duty of being a teacher
चंदौली के चकिया में चंद्रप्रभा साहित्यिक संस्था की ओर से संचालित चंद्रप्रभा साहित्यिक मंच के बैनरतले रविवार को आदित्य पुस्तकालय सभागार में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने काव्य पाठ कर शिक्षक दिवस की महत्ता समझाई।
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गोष्ठी की शुरूआत राजेंद्र प्रसाद भ्रमर ने वाणी वंदना से की। गोष्ठी के पहले पायदान पर आए कवि तेजबली अनपढ़ ने अपनी कविता से आध्यात्म की अलख जगाई। संतोष कुमार मौर्य ने ‘शिक्षक हूं शिक्षक होने का निज कर्तव्य निभाता हूं’... सुनाकर शिक्षक दिवस की महत्ता को स्थापित की। राजेश विश्वकर्मा राजू ने शिक्षक ही बनकर समाज को सजाता रहू मैं सुनाया तो राजेंद्र गुप्त बावरा ने ‘कैसे कहू कि पनघट प्यासा नहीं है’ सुनाकर लोगो को प्रसन्न किया। कवि गोष्ठी में बंधु पाल बंधु, संतोष कुमार धूर्त, राजेंद्र प्रसाद भ्रमर, गौरीशंकर कुशवाहा, रमाशंकर सिंह, राम सजीवन, रामअलम जीवन, राजकुमार विश्वकर्मा ने काव्य पाठ किया।
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