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सूर्य को अर्घ्य दिया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Thu, 19 Nov 2015 01:29 AM IST
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नगर सहित पूरे जनपद में लोक आस्था के महापर्व डाला छठ पर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालुओं ने चार दिवसीय व्रत का पारण किया।
सुबह तालाबों, पोखरों और गंगा घाटों पर मेला लगा रहा और पूरा इलाका छठ के गीतों से गुंजायमान रहा। व्रत के समापन के बाद प्रसाद पाने के लिए लोगों की भीड़ जुटी। विभिन्न तालाबों के आसपास सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए।
सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ के अंतिम दिन भोर में ही उठ कर व्रतियों ने स्नान-ध्यान किया और घाट पर जाने की तैयारी की। कई घरों में तो पूरी रात ही तैयारी होती रही और गीतों और भजन से घर गुलजार रहा।
व्रतियों के साथ परिवार के सदस्य भी जागकर घाट पर जाने की तैयारी में जुटे रहे।
भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए व्रतियों ने सूप और दउरी में फल, पूजन सामग्री, फूल माला, धूप, दीप, पान सुपाड़ी आदि सजाया।
इसके बाद नंगे पैर गंगा घाटों की ओर निकले। पुरुष सदस्यों ने माथे पर दउरी रखी, तो किशोर ने गन्ने को कंधे पर सजाया और व्रती महिलाएं हाथ में कलश और उस पर जलता दीपक लेकर समूह में गीत गाते हुए गंगा घाट की ओर से निकलीं। कुछ बच्चे अलसाए तो कुछ उत्साह के साथ चल रहे थे।
भोर में ढाई से तीन बजे के बीच व्रतियों के घर से बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ व्रती महिलाएं घर से दंडवत करते हुए तालाब पोखरों तक पहुंचीं, तो कुछ बैंड, बाजा, ढोल तासा के साथ पहुंचे।
नगर के मानसरोवर, दामोदरदास पोखरा, आरपीएफ कालोनी, सिकटिया पोखरा, अलीनगर में रामजानकी पोखरा सहित अन्य पोखरों पर पहुंच कर महिलाओं ने पूर्व में बनी वेदी पर पूजा अर्चन किया और दीप प्रज्ज्वलित किया।
इसके बाद व्रतियों ने कमर भर पानी में खड़े को सूर्य की लालिमा दिखने का इंतजार किया। जैसे ही सूर्य के उगने के संकेत दिखे और आसमान में लालिमा छायी, व्रतियों ने सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य दिया।
व्रतियों के परिवार के सदस्यों ने भी जल और दूध से अर्घ्य दिलाया। यही नहीं आसपास के लोगों में भी अर्घ्य दिलाने के लिए होड़ मची रही। पूजा समितियों के अलावा तालाब, पोखरों के आसपास रहने वालों भी अर्घ्य के लिए दूध का इंतजाम किया गया था।
यही नहीं अर्घ्य के बाद व्रतियों को व्रत तोड़ने के लिए चाय आदि का इंतजाम किया गया था। हालांकि अधिकतर व्रतियों ने घर आकर व्रत का पारण किया। तालाब-पोखरों के आसपास मेला लगा रहा।
यहां युवाओं ने खिलौने, गुब्बारे आदि की खरीददारी की। कई जगह आतिशबाजी भी हुई। पूजन के बाद महिलाओं ने लोगों में प्रसाद बांटे। प्रसाद पाने के लिए भी लोगों में होड़ मची रही।
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सुबह तालाबों, पोखरों और गंगा घाटों पर मेला लगा रहा और पूरा इलाका छठ के गीतों से गुंजायमान रहा। व्रत के समापन के बाद प्रसाद पाने के लिए लोगों की भीड़ जुटी। विभिन्न तालाबों के आसपास सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए।
सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ के अंतिम दिन भोर में ही उठ कर व्रतियों ने स्नान-ध्यान किया और घाट पर जाने की तैयारी की। कई घरों में तो पूरी रात ही तैयारी होती रही और गीतों और भजन से घर गुलजार रहा।
व्रतियों के साथ परिवार के सदस्य भी जागकर घाट पर जाने की तैयारी में जुटे रहे।
भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए व्रतियों ने सूप और दउरी में फल, पूजन सामग्री, फूल माला, धूप, दीप, पान सुपाड़ी आदि सजाया।
इसके बाद नंगे पैर गंगा घाटों की ओर निकले। पुरुष सदस्यों ने माथे पर दउरी रखी, तो किशोर ने गन्ने को कंधे पर सजाया और व्रती महिलाएं हाथ में कलश और उस पर जलता दीपक लेकर समूह में गीत गाते हुए गंगा घाट की ओर से निकलीं। कुछ बच्चे अलसाए तो कुछ उत्साह के साथ चल रहे थे।
भोर में ढाई से तीन बजे के बीच व्रतियों के घर से बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ व्रती महिलाएं घर से दंडवत करते हुए तालाब पोखरों तक पहुंचीं, तो कुछ बैंड, बाजा, ढोल तासा के साथ पहुंचे।
नगर के मानसरोवर, दामोदरदास पोखरा, आरपीएफ कालोनी, सिकटिया पोखरा, अलीनगर में रामजानकी पोखरा सहित अन्य पोखरों पर पहुंच कर महिलाओं ने पूर्व में बनी वेदी पर पूजा अर्चन किया और दीप प्रज्ज्वलित किया।
इसके बाद व्रतियों ने कमर भर पानी में खड़े को सूर्य की लालिमा दिखने का इंतजार किया। जैसे ही सूर्य के उगने के संकेत दिखे और आसमान में लालिमा छायी, व्रतियों ने सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य दिया।
व्रतियों के परिवार के सदस्यों ने भी जल और दूध से अर्घ्य दिलाया। यही नहीं आसपास के लोगों में भी अर्घ्य दिलाने के लिए होड़ मची रही। पूजा समितियों के अलावा तालाब, पोखरों के आसपास रहने वालों भी अर्घ्य के लिए दूध का इंतजाम किया गया था।
यही नहीं अर्घ्य के बाद व्रतियों को व्रत तोड़ने के लिए चाय आदि का इंतजाम किया गया था। हालांकि अधिकतर व्रतियों ने घर आकर व्रत का पारण किया। तालाब-पोखरों के आसपास मेला लगा रहा।
यहां युवाओं ने खिलौने, गुब्बारे आदि की खरीददारी की। कई जगह आतिशबाजी भी हुई। पूजन के बाद महिलाओं ने लोगों में प्रसाद बांटे। प्रसाद पाने के लिए भी लोगों में होड़ मची रही।