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वन विभाग ने अवैध निर्माण बताकर तोड़ दी इंटरलॉकिंग सड़क
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नौगढ़। वन विभाग ने मनरेगा योजना से बनी आठ सौ मीटर इंटरलॉकिंग सड़क को आरक्षित वन भूमि पर किया अवैध निर्माण बताते हुए सोमवार को तोड़ दिया। सड़क का निर्माण विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के बैरागढ़ स्थित कम्पोजिट विद्यालय पर बनाए गए पोलिंग बूथ तक आने-जाने के लिए किया गया था। मामले को लेकर क्षेत्र के कई ग्राम प्रधान सोमवार को रोष व्यक्त करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे लेकिन वहां कोई अधिकारी नहीं मिला।
ग्राम प्रधान शांति देवी के प्रतिनिधि रामधार का आरोप है कि अधिकारियों के निर्देश पर मनरेगा योजना से मुख्य मार्ग से कंपोजिट विद्यालय को जोड़ने के लिए इंटरलॉकिंग पद्धति से सड़क का निर्माण कराया गया था। विद्यालय से सटे आस-पास की जमीन पर खेती हो रही है और मकान का निर्माण भी कराया गया है। सारी जमीन गांव सभा की है। गांव वालों के पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद वन विभाग ने सड़क तोड़ने की कार्रवाई की है। उधर वन विभाग के मझगाई रेंज के वन क्षेत्राधिकारी इमरान खान का कहना है कि हल्का वनरक्षक और वन दरोगा वीरेंद्र पांडेय ने उन्हें रिपोर्ट दी थी कि जंगल भूमि पर इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कार्य किया गया है। बताया कि निर्माण शुरू होने के दौरान ग्राम प्रधान को चेतावनी भी जारी की गई थी। इसके बाद भी सड़क बना दिए जाने पर कार्रवाई की गई है।
आरक्षित वन भूमि पर किसी प्रकार का पक्का निर्माण कराना गैरकानूनी है। अगर ऐसा हुआ है तो ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के विरुद्ध भारतीय वन संरक्षण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। दिनेश सिंह, डीएफओ, रामनगर।
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ग्राम प्रधान शांति देवी के प्रतिनिधि रामधार का आरोप है कि अधिकारियों के निर्देश पर मनरेगा योजना से मुख्य मार्ग से कंपोजिट विद्यालय को जोड़ने के लिए इंटरलॉकिंग पद्धति से सड़क का निर्माण कराया गया था। विद्यालय से सटे आस-पास की जमीन पर खेती हो रही है और मकान का निर्माण भी कराया गया है। सारी जमीन गांव सभा की है। गांव वालों के पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद वन विभाग ने सड़क तोड़ने की कार्रवाई की है। उधर वन विभाग के मझगाई रेंज के वन क्षेत्राधिकारी इमरान खान का कहना है कि हल्का वनरक्षक और वन दरोगा वीरेंद्र पांडेय ने उन्हें रिपोर्ट दी थी कि जंगल भूमि पर इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कार्य किया गया है। बताया कि निर्माण शुरू होने के दौरान ग्राम प्रधान को चेतावनी भी जारी की गई थी। इसके बाद भी सड़क बना दिए जाने पर कार्रवाई की गई है।
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आरक्षित वन भूमि पर किसी प्रकार का पक्का निर्माण कराना गैरकानूनी है। अगर ऐसा हुआ है तो ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के विरुद्ध भारतीय वन संरक्षण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। दिनेश सिंह, डीएफओ, रामनगर।
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