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आजादी से पांच वर्ष पूर्व ही धानापुर और सैयदराजा में फहरा था तिरंगा

Sat, 13 Aug 2022 12:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2022 12:36 AM IST
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Five years before independence, the tricolor was hoisted in Dhanapur and Saidaraja.
कंदवा। आजादी के पांच वर्ष पहले वर्ष 1942 में ही जिले में सैयदराजा थाने और धानापुर थाने पर आजादी के मतवालों ने तिरंगा फहरा दिया था। धानापुर में 16 अगस्त को और सैयदराजा थाने पर 28 अगस्त को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने तिरंगा फहरा कर आजादी की घोषणा कर दी थी। इस प्रयास में कई लोगों ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। स्वतंत्रता संग्राम स्मृति स्थल आज भी शहीदों की अमर गाथा सुना रही है।
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लिख रहा हूं मैं अंजाम जिसका कल आगाज आएगा। मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा। मैं रहूं या न रहूं पर ये वादा है तुमसे कि मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा। शहीद ए आजम भगत सिंह की बातें वर्ष 1942 में शोला बन गई। महात्मा गांधी ने नौ अगस्त 1942 को जब करो या मरो का सिंहनाद किया था तो उसकी गूंज धानापुर और सैयदराजा की धरती पर पहुंच गई। धानापुर में क्रांतिकारियों ने 16 अगस्त 1942 को तो सैयदराजा में 28 अगस्त 1942 को जान की बाजी लगाकर थाने पर तिरंगा फहरा दिया। इस प्रयास में 16 अगस्त को धानापुर में हीरा सिंह,महंगू सिंह और रघुनाथ सिंह तो सैयदराजा में 28 अगस्त को श्रीधर, फेकू राय,और गणेश सिंह शहीद हो गए थे।दोनों जगहों में दर्जनों क्रांतिकारी घायल भी हुए थे। धानापुर व सैयदराजा कांड की गूंज ब्रिटेन की संसद में भी गूंजा था और प्रधानमंत्री चर्चिल को बयान देने को मजबूर कर दिया था। शहीद स्मारक समिति सैयदराजा के कोषाध्यक्ष स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू रामनरेश सिंह के पौत्र डॉ. समर बहादुर सिंह का कहना है कि ऐसे वीर सपूतों का वंशज होना भी अभिमान योग्य है। स्वंय आगे बढ़ कर अपने मृत्यु को गले लगाना आसान काम नहीं होता। शहीद स्मारक समिति सैयदराजा के अध्यक्ष मंगला सिंह ने बताया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ऐसे गौरवशाली पूर्वजों के व्यक्तित्व को समाज में जीवंत बनाए रखने के लिए सैयदराजा और धानापुर में शहीद स्मारक की स्थापना की गई है। यहां प्रतिवर्ष निर्धारित तिथियों पर विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
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