चंदौली में नहीं मिल रही खाद: अधिकारी बोले- यूरिया बराबर समितियों पर पहुंच रही फिर भी गायब, कालाबाजारी का आरोप लगा रहे किसान
अधिकारी ने बताया कि जिले में लगातार खाद आ रही है। तो वहीं, किसानों को समितियों पर खाद नहीं मि रहा है। सरकारी समितियों पर खाद न मिलने से किसानों को निजी दुकानों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
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चंदौली जिले में कृषि विभाग से लेकर सहकारिता विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जिले में लगातार खाद मंगाई जा रही है। बावजूद इसके सहकारी समितियों पर से उर्वरक गायब है। जरूरतमंद किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। लगातार इसकी शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद आपूर्ति हो रही है तो समितियों पर क्यों नहीं पहुंच रही है। यह समझ से परे है।
गेहूं की बुआई के बाद उर्वरक डालने की आवश्यकता है। ऐसे में किसान लगातार सहकारी समितियों पर पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ जिले के दर्जनों साधन सहकारी समितियों पर खाद नहीं है। समितियों के चक्कर काट-काटकर किसान थक चुके हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रहा है।
सहकारिता विभाग का दावा है कि खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी। जितना लक्ष्य दिया गया था, उतने खाद की आपूर्ति हो चुकी है। मांग के हिसाब से और खाद मंगाई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कि आखिर खाद जा कहां रही है।
किसान केदार यादव ने कहा कि वर्तमान में समितियों पर खाद गायब है। जो खाद समितियों पर 270 रुपये बोरी मिलनी चाहिए। वह निजी दुकानों पर 350 से 460 रुपये बोरी तक बेची जा रही है। परशुराम शर्मा ने कहा कि समितियों पर चंद बोरी यूरिया खाद आती है और किसानों को लाइन में खड़ा होकर लेना पड़ता है।
किसान दशरथ ने बताया कि बड़े-बड़े किसान समितियों पर खाद आते ही अपनी पैरवी लगाकर ज्यादातर यूरिया की बोरी ले लेते हैं। छोटे-छोटे किसानों को मजबूरी में प्राइवेट दुकानों पर ऊंचे दामों में खरीदना पड़ता है।
सहायक निबंधक के संयुक्त आयुक्त अजय कुमार मौर्य ने बताया कि शिवपुर में 1300 एमटी (मीट्रिक टन) यूरिया का रैक लगा हुआ है। समितियों पर मांग के अनुसार चेक मंगवाकर खाद भेजी जा रही है। पहले भी 500 एमटी खाद आई थी। जिले में खाद की कोई कमी नहीं है।