{"_id":"ab7f664b81ba82322bf237113578e08f","slug":"devotees-worshiped-in-water-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्रतियों ने की पूजा, सूर्य को अर्घ्य आज ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्रतियों ने की पूजा, सूर्य को अर्घ्य आज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Tue, 17 Nov 2015 01:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोक आस्था का महापर्व सूर्य षष्टी के दूसरे दिन छठ व्रतियों ने दिन भर
विज्ञापन
निराजल रहकर शाम को बखीर तैयार किया और पूजन अर्चन के बाद चंद्र दर्शन कर
बखीर खाया।
वहीं व्रतियों ने तालाब, पोखरों पर पहुंच कर घाट पूजन किया और दीप जलाया।
इसके साथ ही 36 घंटे के लिए निराजल उपवास की शुरुआत हो गई।
यही नहीं पूरी रात व्रतियों ने अर्घ्य देने के लिए पकवान की तैयार किया। इसी तरह घरों में छठ व्रत के गीत बजने से माहौल भक्तिमय हो गया।
रात में प्रसाद लेने के लिए लोग एक-दूसरे के घरों में पहुंचे। मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
छठ को लेकर नगर सहित पूरे जिले में उत्साह का माहौल है।
दूसरे दिन व्रतियों ने दिन भर निराजल रहकर सूर्य की उपासना की। शाम के वक्त घरों में शुद्धता पूर्वक बखीर तैयार की गई। इसके बाद चंद्र दर्शन के साथ ही सूर्य की पूजा अर्चना की गई।
रोरी, सिंदूर, कपूर, अगरबत्ती, पान, फूल आदि से पूजन अर्चन कर बखीर का भोग लगाया गया। इसके बाद व्रतियों ने इसका सेवन किया और चंद्रदर्शन कर जल ग्रहण किया।
इसके साथ ही महिलाओं का 36 घंटे के लिए निराजल व्रत शुरू हो गया। इसके पूर्व घरों को विद्युत झालरों से सजाया गया और व्रत के मद्देनजर लोगों के घरों में काफी रिश्तेदार भी जुट गए हैं।
व्रतियों के रहने के लिए अलग इंतजाम किया गया। घरों में सूर्योपासना के गीत गाए जा रहे हैं। वहीं घरों में म्यूजिक सिस्टमों पर भी देवी गीत गूंज रहे हैं।
महिलाओं के भोग लगाने के बाद परिवार सहित आस पास के लोगों को प्रसाद के रूप में बखीर और रोटी का प्रसार बांटा गया। प्रसाद को पाने के लिए व्रतियों के घर में लोगों की भीड़ जुटी।
इसके साथ ही मंगलवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए महिलाओं ने पकवान बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी।
वहीं व्रतियों ने तालाब, पोखरों पर पहुंच कर घाट पूजन किया और दीप जलाया।
इसके साथ ही 36 घंटे के लिए निराजल उपवास की शुरुआत हो गई।
यही नहीं पूरी रात व्रतियों ने अर्घ्य देने के लिए पकवान की तैयार किया। इसी तरह घरों में छठ व्रत के गीत बजने से माहौल भक्तिमय हो गया।
रात में प्रसाद लेने के लिए लोग एक-दूसरे के घरों में पहुंचे। मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
छठ को लेकर नगर सहित पूरे जिले में उत्साह का माहौल है।
दूसरे दिन व्रतियों ने दिन भर निराजल रहकर सूर्य की उपासना की। शाम के वक्त घरों में शुद्धता पूर्वक बखीर तैयार की गई। इसके बाद चंद्र दर्शन के साथ ही सूर्य की पूजा अर्चना की गई।
रोरी, सिंदूर, कपूर, अगरबत्ती, पान, फूल आदि से पूजन अर्चन कर बखीर का भोग लगाया गया। इसके बाद व्रतियों ने इसका सेवन किया और चंद्रदर्शन कर जल ग्रहण किया।
इसके साथ ही महिलाओं का 36 घंटे के लिए निराजल व्रत शुरू हो गया। इसके पूर्व घरों को विद्युत झालरों से सजाया गया और व्रत के मद्देनजर लोगों के घरों में काफी रिश्तेदार भी जुट गए हैं।
व्रतियों के रहने के लिए अलग इंतजाम किया गया। घरों में सूर्योपासना के गीत गाए जा रहे हैं। वहीं घरों में म्यूजिक सिस्टमों पर भी देवी गीत गूंज रहे हैं।
महिलाओं के भोग लगाने के बाद परिवार सहित आस पास के लोगों को प्रसाद के रूप में बखीर और रोटी का प्रसार बांटा गया। प्रसाद को पाने के लिए व्रतियों के घर में लोगों की भीड़ जुटी।
इसके साथ ही मंगलवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए महिलाओं ने पकवान बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी।