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बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति से मंडरा रहा खतरा
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शासन स्तर से जिले के 434 मजरों में जर्जर बिजली के तार व खंभों को बदले जाने का कार्य करीब छह माह से चल रहा है। इसके बाद भी कई गांवों में आज भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है। कई जगहों पर बांस भी टूटे हैं। वहीं तार काफी नीचे लटक रहे हैं। इससे स्थानीय रहवासियों में हादसे की आशंका बनी हुई है। लोगों की शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों का आरोप है कि बिजली बिल तो लिया जा रहा है पर सुविधाएं नदारद है।
बरहनी ब्लॉक के मजरों व गांवों से जर्जर बिजली के तारों को बदलने का कार्य आरंभ किया गया था। योजना के तहत सभी नौ ब्लॉकों के ऐसे मजरों या गांवों का चयन किया गया जिनमें रहने वाले ग्रामीणों की आबादी एक हजार या उससे अधिक है। बिजली विभाग की मानें तो अब तक सभी ब्लॉक के 80 मजरों में तार व खंभे बदलने का कार्य पूरा कर लिया गया है। वहीं 40 गांवों में कार्य प्रगति पर है। वहीं 314 गांवों व मजरों में सर्वे का कार्य चल रहा है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय दावे जमीनी हकीकत के विपरीत है। नगर के कूढ़े खुर्द, हनुमानपुर, काली महाल, नई बस्ती सहित कई इलाकों में अभी भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। ताराजीवनपुर क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन गांव में जर्जर लकड़ी के खंभे व विद्युत तार से आए दिन दुर्घटना होती रहती हैं। क्षेत्र के रामपुर, डिग्घी, संघती, बसनी, रेवसा सहित आधा दर्जन गांव में अभी भी जर्जर लकड़ी के खंभे, बांस व बल्लियों के सहारे जर्जर तार से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। इससे लोगों में हमेशा भय का माहौल बना रहता है।
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बरहनी ब्लॉक के मजरों व गांवों से जर्जर बिजली के तारों को बदलने का कार्य आरंभ किया गया था। योजना के तहत सभी नौ ब्लॉकों के ऐसे मजरों या गांवों का चयन किया गया जिनमें रहने वाले ग्रामीणों की आबादी एक हजार या उससे अधिक है। बिजली विभाग की मानें तो अब तक सभी ब्लॉक के 80 मजरों में तार व खंभे बदलने का कार्य पूरा कर लिया गया है। वहीं 40 गांवों में कार्य प्रगति पर है। वहीं 314 गांवों व मजरों में सर्वे का कार्य चल रहा है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय दावे जमीनी हकीकत के विपरीत है। नगर के कूढ़े खुर्द, हनुमानपुर, काली महाल, नई बस्ती सहित कई इलाकों में अभी भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। ताराजीवनपुर क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन गांव में जर्जर लकड़ी के खंभे व विद्युत तार से आए दिन दुर्घटना होती रहती हैं। क्षेत्र के रामपुर, डिग्घी, संघती, बसनी, रेवसा सहित आधा दर्जन गांव में अभी भी जर्जर लकड़ी के खंभे, बांस व बल्लियों के सहारे जर्जर तार से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। इससे लोगों में हमेशा भय का माहौल बना रहता है।
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