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गिलोय के सेवन से कोरोना संक्रमितों को होगा फायदा
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चहनिया। गिलोय को आयुर्वेद जगत का एक ऐसा पौधा माना गया है जो मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने मे अहम भूमिका निभाता है। कोरोना जैसी महामारी का इलाज संपूर्ण विश्व में खोजा जा रहा है। अब तक हुए शोध में निष्कर्ष भी निकला है कि गिलोय का पौधा मानव जीवन की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए रामबाण साबित हो सकता है। इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए बीएचयू का आयुर्वेद विभाग आगे आया है। विभाग ने जिले सभी गांवों मे गिलोय का पौधा मुफ्त में बांटने का निर्णय लिया है। इससे किसानों को अपनी आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी। यह जानकारी गिलोय मिशन के जिला समन्वयक यशवंत सिंह यादव ने दी है।
बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय की ओर से भारत सरकार के नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड नई दिल्ली के तहत गिलोय मिशन कार्यक्रम वाराणसी, मिर्जापुर व आजमगढ मंडल के सभी जिलों संचालित हो रहा है। इसके पौधे का मुफ्त में वितरण किया जा रहा है। अब चंदौली जिले के प्रत्येक ग्राम पंचायत को यह पौधा बीएचयू आयुर्वेद विभाग के तरफ से दिया जाएगा। बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएचयू आयुर्वेद विभाग की ओर से जिले में लगभग 15 से 20 हजार गिलोय का पौधा बांटा जाएगा। इस पौधे का प्रयोग मेडिसिनल प्लांट खेती के रूप में होगा। आने वाले समय में इसकी मांग दवा बनाने वाली कंपनियां युद्धस्तर पर करेंगी। अभी यह पौधा कोरोना वायरस से जूझ रहे लोगों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है।
जिला प्रशासन ने बढ़ाया हाथ
जिले मे गिलोय के पौधे के वितरण के लिए जिला प्रशासन ने सहयोग की हामी भर दी है। बीएचयू के आयुर्वेद विभाग के संकाय प्रमुख प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी ने पत्र के माध्यम से सभी जिला अधिकारियों से गिलोय वितरण के लिए सहयोग मांगा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि कोरोना जैसी महामारी से बचाव के लिए गिलोय की अहम भूमिका है। इसका काढ़ा पीने से मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। मिशन के जिला समन्वयक यशवंत सिंह यादव ने बताया मुख्य विकास अधिकारी डॉ. एके श्रीवास्तव ने भी भरोसा दिलाया है कि जिले में इसे बढ़ावा दिया जाएगा और मदद की जाएगी।
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बढेगी किसानों की आय
गिलोय कोरोना वायरस जैसी महामारी में उपचार के लिए रामबाण साबित होगा। इसलिए इसकी मांग युद्धस्तर पर होगी। इसकी खेती करने वाले किसानों की आय भी निश्चित तौर पर बढ़ेगी। गिलोय मिशन के जिला समन्वयक ने बताया कि गिलोय की खेती करने के लिए बहुत अधिक भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कम भूमि में ही खेती करके अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
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बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय की ओर से भारत सरकार के नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड नई दिल्ली के तहत गिलोय मिशन कार्यक्रम वाराणसी, मिर्जापुर व आजमगढ मंडल के सभी जिलों संचालित हो रहा है। इसके पौधे का मुफ्त में वितरण किया जा रहा है। अब चंदौली जिले के प्रत्येक ग्राम पंचायत को यह पौधा बीएचयू आयुर्वेद विभाग के तरफ से दिया जाएगा। बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएचयू आयुर्वेद विभाग की ओर से जिले में लगभग 15 से 20 हजार गिलोय का पौधा बांटा जाएगा। इस पौधे का प्रयोग मेडिसिनल प्लांट खेती के रूप में होगा। आने वाले समय में इसकी मांग दवा बनाने वाली कंपनियां युद्धस्तर पर करेंगी। अभी यह पौधा कोरोना वायरस से जूझ रहे लोगों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है।
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जिला प्रशासन ने बढ़ाया हाथ
जिले मे गिलोय के पौधे के वितरण के लिए जिला प्रशासन ने सहयोग की हामी भर दी है। बीएचयू के आयुर्वेद विभाग के संकाय प्रमुख प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी ने पत्र के माध्यम से सभी जिला अधिकारियों से गिलोय वितरण के लिए सहयोग मांगा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि कोरोना जैसी महामारी से बचाव के लिए गिलोय की अहम भूमिका है। इसका काढ़ा पीने से मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। मिशन के जिला समन्वयक यशवंत सिंह यादव ने बताया मुख्य विकास अधिकारी डॉ. एके श्रीवास्तव ने भी भरोसा दिलाया है कि जिले में इसे बढ़ावा दिया जाएगा और मदद की जाएगी।
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बढेगी किसानों की आय
गिलोय कोरोना वायरस जैसी महामारी में उपचार के लिए रामबाण साबित होगा। इसलिए इसकी मांग युद्धस्तर पर होगी। इसकी खेती करने वाले किसानों की आय भी निश्चित तौर पर बढ़ेगी। गिलोय मिशन के जिला समन्वयक ने बताया कि गिलोय की खेती करने के लिए बहुत अधिक भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कम भूमि में ही खेती करके अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।