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बच्चों की जान सांसत में , ऑटो और ई-रिक्शा में ढोये जा रहे हैं बच्चे..
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पीडीडीयू नगर। एक तरफ जिले का एआरटीओ विभाग अनफिट स्कूली वाहनों को नोटिस जारी करने व उनकी धड़ पकड़ के लिए अभियान चला रहा है वहीं दूसरी ओर बच्चों को सांसत में डालकर ऑटो और ई- रिक्शा से स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। इस लापरवाही पर न तो स्कूल प्रबंधन ध्यान दे रहा और न ही एआरटीओ विभाग। वहीं अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाह बने हुए हैं।
गाजियाबाद में स्कूली बस से सिर बाहर निकालने पर हुए बच्चे की मौत के बाद शासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जिसे लेकर परिवहन विभाग ने सक्रियता बढ़ा दी है। हालांकि विभाग की जांच का दायरा काफी सिमट गया है। विभाग स्कूली बसों के फिटनेस से लेकर कागजों पर ही ध्यान दिया जा रहा है। जबकि जिले में 200 से अधिक ऑटो, मैजिक और ई- रिक्शा से स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। इसमें बच्चों को ढोने वाले कितने वाहन हैं इसका विभाग के पास कोई डाटा नहीं है। बच्चों को सांसत में डालकर उन्हें ऑटो और ई- रिक्शा में ढोया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक भी उदासीन बनें हुए है।
पीडीडीयू नगर। जिले में अनफिट वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। बच्चों को ढोने में लगे अधिकतर मैजिक और विक्रम की स्थिति जर्जर है। इसके अलावा अधिक कमाई के चक्कर में वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह ठूंस दिया जा रहा है। संवाद
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विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। अभिभावकों को भी चाहिए कि ऑटो और ई-रिक्शा से बच्चों को स्कूल न भेजे। शिकायत मिलने पर ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जाती है। - डॉ. दिलीप गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन, चंदौली
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गाजियाबाद में स्कूली बस से सिर बाहर निकालने पर हुए बच्चे की मौत के बाद शासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जिसे लेकर परिवहन विभाग ने सक्रियता बढ़ा दी है। हालांकि विभाग की जांच का दायरा काफी सिमट गया है। विभाग स्कूली बसों के फिटनेस से लेकर कागजों पर ही ध्यान दिया जा रहा है। जबकि जिले में 200 से अधिक ऑटो, मैजिक और ई- रिक्शा से स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। इसमें बच्चों को ढोने वाले कितने वाहन हैं इसका विभाग के पास कोई डाटा नहीं है। बच्चों को सांसत में डालकर उन्हें ऑटो और ई- रिक्शा में ढोया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक भी उदासीन बनें हुए है।
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पीडीडीयू नगर। जिले में अनफिट वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। बच्चों को ढोने में लगे अधिकतर मैजिक और विक्रम की स्थिति जर्जर है। इसके अलावा अधिक कमाई के चक्कर में वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह ठूंस दिया जा रहा है। संवाद
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विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। अभिभावकों को भी चाहिए कि ऑटो और ई-रिक्शा से बच्चों को स्कूल न भेजे। शिकायत मिलने पर ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जाती है। - डॉ. दिलीप गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन, चंदौली