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ईश्वर को याद न करने वालों का घर होता है श्मशान के समान:जीयर स्वामी
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चहनिया। शास्त्र में बताया गया है कि जिस घर, समाज, राष्ट्र, प्रजा व समुदाय में ईश्वर व ब्रह्म को कभी याद, उनका चिंतन, ध्यान व गुणगान न किया जाता हो तथा जहां सदाचारी, संत-महात्मा, ज्ञानी स्त्रियों का आदर न हो वहां सुख-शांति नहीं होती है। जहां ईश्वर का याद किया जाता है वहां लक्ष्मी का वास होता है।
ये बातें कैलावर गांव में पांच नवंबर तक चलने वाले चतुर्मास यज्ञ के दौरान मंगलवार को संत जीयर स्वामी ने कही। कहा कि इसके अलावा जहां पर जुआ खेला जाए, शराब का व्यसन हो, अनेक प्रकार के उपद्रवकारी रहते हों, वह घर भी श्मशान के समान होता है। मनुष्य भोजन, शयन व संतान उत्पति तो अनेक योनियों में करता हैं लेकिन मानव योनि की पहचान संस्कृति, संस्कार, सभ्यता, सरलता, सहजता व कोमलता से होती है। यदि यह मनुष्य का जन्म लेकर पशुओं के समान भोजन और संतानोत्पत्ति ही करे तो ऐसे मनुष्य और पशु में कोई अंतर नहीं होता है। कहा कि अपना उद्धार व कल्याण चाहने वाले मनुष्य को ब्रह्म बेला में जगने के बाद कर श्रीहरि का तीन बार उच्चारण करना चाहिए। ऐसा करने से जाने-अनजाने में किए गए अपराधों के क्षम्य हो जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा सुबह उठते ही अपनी हथेलियों का दर्शन करना चाहिए क्योंकि इनके अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य भाग में सरस्वती व मूल भाग में गोविंद विराजते हैं। इस मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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ये बातें कैलावर गांव में पांच नवंबर तक चलने वाले चतुर्मास यज्ञ के दौरान मंगलवार को संत जीयर स्वामी ने कही। कहा कि इसके अलावा जहां पर जुआ खेला जाए, शराब का व्यसन हो, अनेक प्रकार के उपद्रवकारी रहते हों, वह घर भी श्मशान के समान होता है। मनुष्य भोजन, शयन व संतान उत्पति तो अनेक योनियों में करता हैं लेकिन मानव योनि की पहचान संस्कृति, संस्कार, सभ्यता, सरलता, सहजता व कोमलता से होती है। यदि यह मनुष्य का जन्म लेकर पशुओं के समान भोजन और संतानोत्पत्ति ही करे तो ऐसे मनुष्य और पशु में कोई अंतर नहीं होता है। कहा कि अपना उद्धार व कल्याण चाहने वाले मनुष्य को ब्रह्म बेला में जगने के बाद कर श्रीहरि का तीन बार उच्चारण करना चाहिए। ऐसा करने से जाने-अनजाने में किए गए अपराधों के क्षम्य हो जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा सुबह उठते ही अपनी हथेलियों का दर्शन करना चाहिए क्योंकि इनके अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य भाग में सरस्वती व मूल भाग में गोविंद विराजते हैं। इस मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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