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Chandauli News: चहनिया ब्लॉक प्रमुख समेत तीन पर दर्ज होगा मुकदमा
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चंदौली। ब्लॉक प्रमुख चहनिया अरुण कुमार जायसवाल विरोधियों को मात देकर कुर्सी बचाने में तो सफल हो गए लेकिन उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रहीं। बुधवार को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट ने ब्लाॅक प्रमुख समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश बलुआ थानाध्यक्ष को दिया है।
पपौरा के बीडीसी मुकेश खरवार चहनियां ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास की मांग को लेकर 66 बीडीसी के साथ जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत हुए थे। आरोप है कि 14 मार्च 2024 को राधाकृष्ण मंदिर, पपौरा में दर्शन-पूजन के दौरान गांव के गोपाल सिंह उर्फ बबलू और मोनू सिंह ने प्रमुख के पक्ष में तैयार हलफनामे पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। उन्होंने इन्कार किया तो दोनों ने मारपीट और गाली-गलौज करने के साथ जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया। यही नहीं, आरोपी जबरन उन्हें बाइक पर बैठाकर ले जाने लगे लेकिन पत्नी जीरानी देवी और आसपास के लोगों ने बचा लिया। पीड़ित बीडीसी बलुआ पुलिस और एसपी से फरियाद लगाई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां विपक्षियों ने जाति पर सवाल किया। इसके बाद अदालत ने परिवाद दर्ज किया। इस पर पीड़ित बीडीसी हाईकोर्ट पहुंचे, जहां निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया गया। फिर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट राम बाबू यादव की अदालत ने उनके प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया। अदालत ने बुधवार को मामले में बलुआ थानाध्यक्ष को ब्लाॅक प्रमुख चहनिया अरुण कुमार जायसवाल, उनके सहयोगी गोपाल सिंह उर्फ बबलू और मोनू सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही मामले की विवेचना कर कोर्ट में आख्या पेश करने को कहा।
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पपौरा के बीडीसी मुकेश खरवार चहनियां ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास की मांग को लेकर 66 बीडीसी के साथ जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत हुए थे। आरोप है कि 14 मार्च 2024 को राधाकृष्ण मंदिर, पपौरा में दर्शन-पूजन के दौरान गांव के गोपाल सिंह उर्फ बबलू और मोनू सिंह ने प्रमुख के पक्ष में तैयार हलफनामे पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। उन्होंने इन्कार किया तो दोनों ने मारपीट और गाली-गलौज करने के साथ जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया। यही नहीं, आरोपी जबरन उन्हें बाइक पर बैठाकर ले जाने लगे लेकिन पत्नी जीरानी देवी और आसपास के लोगों ने बचा लिया। पीड़ित बीडीसी बलुआ पुलिस और एसपी से फरियाद लगाई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां विपक्षियों ने जाति पर सवाल किया। इसके बाद अदालत ने परिवाद दर्ज किया। इस पर पीड़ित बीडीसी हाईकोर्ट पहुंचे, जहां निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया गया। फिर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट राम बाबू यादव की अदालत ने उनके प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया। अदालत ने बुधवार को मामले में बलुआ थानाध्यक्ष को ब्लाॅक प्रमुख चहनिया अरुण कुमार जायसवाल, उनके सहयोगी गोपाल सिंह उर्फ बबलू और मोनू सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही मामले की विवेचना कर कोर्ट में आख्या पेश करने को कहा।
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