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Chandauli News: स्ट्रेचर खींच रहे तीमारदार, आराम फरमा रहे सेवादार

Sun, 21 Sep 2025 01:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 01:06 AM IST
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Attendants pulling stretchers, attendants resting
11 जिला अस्पताल में स्ट्रेचर पर मरीज को खुद लेकर जाते परिजन। संवाद - फोटो : mathura
बलरामपुर। सरकारी अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी मरीजों और तीमारदारों को समस्याओं से जूझना पड़ता है। शनिवार को जिला अस्पताल की पड़ताल यहां तैनात अधिकांश वार्ड बॉय आराम कर रहे हैं। वहीं तीमारदार मरीजों को स्ट्रेचर पर बैठाकर ले जा रहे हैं। जिला अस्पताल में 36 वार्ड बॉय तैनात हैं। उनके वेतन पर हर महीने लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी मरीजोें और तीमारदारों को परेशान होना पड़ रहा है। मंडलीय जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 1000 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें कुछ आम बिमारियों से पीड़ित होकर पहुंचते हैं तो कुछ इमरजेंसी में दुर्घटना या घटना के बाद पहुंचते हैं।
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इमरजेंसी में आने वाले और भर्ती योग्य मरीजों को ओपीडी से बेड तक पहुंचाने के लिए और उनकी चिकित्सक की लिखी गई जांच कराने के लिए वार्ड बॉय की तैनाती है। इनका काम है कि यह मरीजों को स्ट्रेचर या व्हील चेयर के जरिए पैथोलॉजी सेंटर, एक्सरे रूम, सोनोग्राफी रूम या फिर वार्ड तक पहुंचाएं। इसके लिए मंडलीय जिला चिकित्सालय में 36 वार्ड बॉय तैनात हैं।
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शनिवार को जब दोपहर 12 बजे अस्पताल में पड़ताल की गई तो वार्ड बॉय का पता नहीं था और तीमारदार स्ट्रेचर पर मरीज को लिटाकर खुद ही उसे खींच रहे थे। शनिवार को अस्पताल गेट पर एक दुर्घटना हो गई। इस दुर्घटना में बलरामपुर निवासिनी गुड्डी देवी 50 घायल हो गई। उन्हें गंभीर चोटें आई। चिकित्सक ने उन्हें एडमिट करते हुए एक्सरे कराने की सलाह दी। एक्सरे कराने के लिए उनके परिजन खुद ही उन्हें लिटाकर खींचते नजर आए। इसी तरह से कई अन्य मरीजों के तीमारदार भी स्ट्रेचर खींच रहे थे। 00
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बाथरूम के पास रखे थे स्ट्रेचर
जिस स्ट्रेचर को वार्ड में या फिर इमरजेंसी के पास होना चाहिए वह स्ट्रेचर अस्पताल में बने बाथरूम के पास रखा हुआ था। इसे मरीजों के परिजनों ने मरीज को बेड पर पहुंचाने के बाद छोड़ा था। अस्पताल प्रशासन ने इस स्ट्रेचरों को उचित स्थान पर पहुंचाने की भी जहमत नहीं उठाई थी।

अस्पताल में कुछ 36 वार्ड बाॅय तैनात हैं। लेकिन, यह कम हैं कम से कम इतने वार्ड बॉय और मिलें तो काम चलें। क्योंकि जो वार्ड बॉय हैं उनमें से किसी की तैनाती चिकित्सक की ओपीडी में तो किसी की वार्ड में होती है। ऐसे में हर जगह वह नहीं मिल सकते। जो वार्ड बॉय हैं उनकी आठ-आठ घंटे की ड्यूटी लगाई जाती है। - डाॅ. ओम प्रकाश सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक।
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