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आठ दिन बाद गंगा नदी के किनारे मिला अरुण का क्षत-विक्षत शव
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चहनिया। बलुआ थाना क्षेत्र के टांडाकला गांव निवासी अरुण शर्मा का शव हत्या के आठवें दिन शनिवार को गंगा नदी के किनारे नादी गांव के समीप क्षत विक्षत हाल में मिला। जानवरों द्वारा शरीर को नोच लिए जाने की वजह से शव की पहचान नहीं हो पा रही थी। अरुण शर्मा के भाई विनोद शर्मा ने अंगुली में फंसी चांदी की अंगूठी, उसके कपड़े आदि से पहचान की। पुलिस ने शव के अवशेष को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
टांडा कला गांव निवासी होम्योपैथ क्लीनिक संचालक अरुण शर्मा की पत्नी प्रियंका ने प्रेमी संग मिलकर 30 जनवरी की रात हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव को गंगा नदी में फेंक दिया। मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने अरुण की पत्नी प्रियंका और उसके प्रेमी को जेल भेज दिया। हत्या में शामिल एक आरोपी अभी फरार चल रहा है। 31 जनवरी से ही पुलिस अरुण की तलाश शुरू कर दी लेकिन उसका पता नहीं चला। दो फरवरी को एनडीआरएफ की टीम न पहुंचने से नाराज ग्रामीणों ने बलुआ थाने का घेराव किया। इसके बाद वाराणसी से आई जल पुलिस और बबुरी के गोताखोरों की मदद से लगातार अलग-अलग स्थानों पर शव की तलाश की गई। शनिवार को कैथी घाट से लगभग दस किमी दूर नादी गांव के समीप ग्रामीणों ने नदी के किनारे क्षत विक्षत शव देखा तो पुलिस को सूचित किया। शव को कुत्ते नोच रहे थे और शव का सिर, शरीर से मांस गायब थे। शव के नाम पर सिर्फ हड्डियों का ढांचा भर था। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने मृतक अरुण के भाई विनोद शर्मा को बुलाया। विनोद शर्मा ने हाथ की हड्डी में फंसी चांदी की अंगूठी, लोवर, इनर के आधार पर शव की पहचान अरुण शर्मा के रूप में की। पुलिस ने शव के अवशेष को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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टांडा कला गांव निवासी होम्योपैथ क्लीनिक संचालक अरुण शर्मा की पत्नी प्रियंका ने प्रेमी संग मिलकर 30 जनवरी की रात हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव को गंगा नदी में फेंक दिया। मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने अरुण की पत्नी प्रियंका और उसके प्रेमी को जेल भेज दिया। हत्या में शामिल एक आरोपी अभी फरार चल रहा है। 31 जनवरी से ही पुलिस अरुण की तलाश शुरू कर दी लेकिन उसका पता नहीं चला। दो फरवरी को एनडीआरएफ की टीम न पहुंचने से नाराज ग्रामीणों ने बलुआ थाने का घेराव किया। इसके बाद वाराणसी से आई जल पुलिस और बबुरी के गोताखोरों की मदद से लगातार अलग-अलग स्थानों पर शव की तलाश की गई। शनिवार को कैथी घाट से लगभग दस किमी दूर नादी गांव के समीप ग्रामीणों ने नदी के किनारे क्षत विक्षत शव देखा तो पुलिस को सूचित किया। शव को कुत्ते नोच रहे थे और शव का सिर, शरीर से मांस गायब थे। शव के नाम पर सिर्फ हड्डियों का ढांचा भर था। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने मृतक अरुण के भाई विनोद शर्मा को बुलाया। विनोद शर्मा ने हाथ की हड्डी में फंसी चांदी की अंगूठी, लोवर, इनर के आधार पर शव की पहचान अरुण शर्मा के रूप में की। पुलिस ने शव के अवशेष को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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