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Chandauli News: सड़क चौड़ीकरण के नाम पर गड़ई नदी को पाटने का आरोप
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सड़क चौड़ीकरण से पाटी गई ओल्ड गड़ई नदी। संवाद
पूर्व सांसद रामकिशुन ने कहा-नदी को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सपा करेगी आंदोलन
नियामताबाद। पीडीडीयू नगर-चकिया मार्ग के चौड़ीकरण के लिए गड़ई नदी के अस्तित्व पर संकट गहराने का आरोप लगाते हुए पूर्व सांसद रामकिशुन ने कहा कि चौड़ीकरण के नाम पर गड़ई नदी को पाटकर स्वरूप खत्म किया जा रहा है। जबकि नदी पूरे क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी है। बाढ़ में यही नदी आसपास के गांवों के जलभराव की निकासी का प्रमुख माध्यम बनती है, इससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है।
सपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। चेताया कि यदि नदी को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सपा व्यापक आंदोलन करेगी। बताया कि गड़ई नदी में पानी की निकासी पचोखर, पिड़खीर, उसरौडी, बौरी ताल, सिरसी और राजा बाहा सहित कई स्थानों से होती है। वर्ष 2004-05 में 29 करोड़ रुपये की लागत से नदी की खोदाई कराई गई थी। जिससे इसका प्रवाह सुचारु रूप से चल रहा था, लेकिन उसके बाद से नदी की नियमित सफाई नहीं कराई गई। आरोप लगाया कि वर्तमान में भाजपा सरकार में सड़क चौड़ीकरण के दौरान नदी को पाटकर उसका अस्तित्व ही मिटाया जा रहा है। सत्तापक्ष किसानों के हितों की अनदेखी कर रहा है। यह किसानों के साथ धोखा है। बताया कि चकिया रोड पूर्व में काशी नरेश की सड़क हुआ करती थी, जिसे बाद में राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य सरकार के अधीन किया गया। गड़ई नदी का अस्तित्व इससे भी पहले से रहा है, लेकिन लोक निर्माण विभाग और बंधी डिवीजन की कार्यप्रणाली से इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
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नियामताबाद। पीडीडीयू नगर-चकिया मार्ग के चौड़ीकरण के लिए गड़ई नदी के अस्तित्व पर संकट गहराने का आरोप लगाते हुए पूर्व सांसद रामकिशुन ने कहा कि चौड़ीकरण के नाम पर गड़ई नदी को पाटकर स्वरूप खत्म किया जा रहा है। जबकि नदी पूरे क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी है। बाढ़ में यही नदी आसपास के गांवों के जलभराव की निकासी का प्रमुख माध्यम बनती है, इससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है।
सपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। चेताया कि यदि नदी को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सपा व्यापक आंदोलन करेगी। बताया कि गड़ई नदी में पानी की निकासी पचोखर, पिड़खीर, उसरौडी, बौरी ताल, सिरसी और राजा बाहा सहित कई स्थानों से होती है। वर्ष 2004-05 में 29 करोड़ रुपये की लागत से नदी की खोदाई कराई गई थी। जिससे इसका प्रवाह सुचारु रूप से चल रहा था, लेकिन उसके बाद से नदी की नियमित सफाई नहीं कराई गई। आरोप लगाया कि वर्तमान में भाजपा सरकार में सड़क चौड़ीकरण के दौरान नदी को पाटकर उसका अस्तित्व ही मिटाया जा रहा है। सत्तापक्ष किसानों के हितों की अनदेखी कर रहा है। यह किसानों के साथ धोखा है। बताया कि चकिया रोड पूर्व में काशी नरेश की सड़क हुआ करती थी, जिसे बाद में राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य सरकार के अधीन किया गया। गड़ई नदी का अस्तित्व इससे भी पहले से रहा है, लेकिन लोक निर्माण विभाग और बंधी डिवीजन की कार्यप्रणाली से इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
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