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पात्र गृहस्थी योजना से बाहर किए गए सत्रह हजार अपात्र
Updated Sat, 15 Jul 2017 01:27 AM IST
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चंदौली। पूर्ववर्ती सपा सरकार में सत्रह हजार से अधिक अपात्र व्यक्ति पात्र गृहस्थी योजना का लाभ ले रहे थे। जिला प्रशासन की ओर से कराए गए राशन कार्डों के सत्यापन में यह आंकड़ा सामने आया है। सत्यापन कार्य के लिए गठित 358 टीमों ने घर-घर जाकर कार्डों का सत्यापन किया, जिसमें बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थी पाए गए। फिलहाल अपात्रों का नाम सूची से हटाकर 19012 पात्र लोगों को नई सूची में शामिल किया गया है।
गरीब परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई पात्र गृहस्थी योजना में भारी संख्या में अपात्रों को भी शामिल किया गया था। योगी सरकार द्वारा कार्ड धारकों के कराए गए सत्यापन में जो आंकड़े सामने आए हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं। जनपद में भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्ड लाभार्थियों के सत्यापन के लिए 462 टीमें बनाई गईं थीं। इसमें से 358 टीमों ने दो लाख 43 हजार 502 कार्डधारकों के यहां जाकर सत्यापन किया। इसमें 17 हजार 505 अपात्र लाभार्थी मिले जो कोटेदारों, ग्राम प्रधान और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से योजना का लाभ प्राप्त कर रहे थे। इस बाबत जिला पूर्ति अधिकारी सीमा सिंह का कहना है कि सत्यापन में अपात्र पाए गए 17 हजार 505 लोगों को हटाकर 1912 पात्र लोगों को सूची में जोड़ा जा चुका है। जनपद में लाभार्थियों की संख्या तीन लाख 19 हजार 12 हो चुकी है। अपात्रों को लेकर शासन के अगले निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
गरीब परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई पात्र गृहस्थी योजना में भारी संख्या में अपात्रों को भी शामिल किया गया था। योगी सरकार द्वारा कार्ड धारकों के कराए गए सत्यापन में जो आंकड़े सामने आए हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं। जनपद में भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्ड लाभार्थियों के सत्यापन के लिए 462 टीमें बनाई गईं थीं। इसमें से 358 टीमों ने दो लाख 43 हजार 502 कार्डधारकों के यहां जाकर सत्यापन किया। इसमें 17 हजार 505 अपात्र लाभार्थी मिले जो कोटेदारों, ग्राम प्रधान और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से योजना का लाभ प्राप्त कर रहे थे। इस बाबत जिला पूर्ति अधिकारी सीमा सिंह का कहना है कि सत्यापन में अपात्र पाए गए 17 हजार 505 लोगों को हटाकर 1912 पात्र लोगों को सूची में जोड़ा जा चुका है। जनपद में लाभार्थियों की संख्या तीन लाख 19 हजार 12 हो चुकी है। अपात्रों को लेकर शासन के अगले निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
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