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खंडहर में तब्दील हो रहा सिंचाई विभाग का निरीक्षण गृह
Updated Mon, 10 Sep 2018 12:49 AM IST
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खंडहर में तब्दील हो रहा सिंचाई विभाग का निरीक्षण गृह
चार दशक पूर्व हुआ था निरीक्षण गृह का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
इलिया। उत्तर प्रदेश- बिहार की सीमा पर स्थित बनरसिया माइनर के पास बना सिंचाई विभाग का निरीक्षण गृह उपेक्षा का शिकार है। इस निरीक्षण गृह में कर्मचारियों के साथ समय-समय पर अधिकारी रुकते थे। राइट कर्मनाशा नहर द्वारा बिहार प्रांत को पानी भेजने के लिए माइनर में लगे गेट द्वारा मापी यंत्र से निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ने का जांच कार्य किया करते रहे। मगर देख-रेख के अभाव में यह भवन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
मूसाखांड़ बांध से संचालित होने वाले लतीफशाह बीयर द्वारा राइट कर्मनाशा नहर से क्षेत्र के गांव को सिंचाई के साथ ही बिहार प्रांत के कैमूर जिले के चांद प्रखंड के गांवों की सिंचाई इसी नहर से की जाती है। मानक के अनुसार पानी की आपूर्ति हो इसके लिए कर्मचारियों को बनरसिया माइनर पर ठहरने के लिए निरीक्षण गृह का निर्माण चार दशक पूर्व किया गया था। निर्माण के एक दशक तक विभागीय कर्मचारी को ठहरने के साथ ही समय-समय पर अधिकारी भी यहां ठहरते रहे। पिछले दिनों नक्सली गतिविधियों के हावी होने से भयग्रस्त सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने निरीक्षण गृह में रहना छोड़ दिया। उस दौरान कुछ दिनों तक निरीक्षण गृह में पीएसी कैंप का ठहराव किया गया था। मगर पीएसी के जवानों के चले जाने के बाद एक दशक से यह निरीक्षण गृह पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है। इसके कारण रख-रखाव के अभाव में यह भवन खंडहर में तब्दील होने की कगार पर है। बरसात के दिनों में टपकते छत के पानी से यह भवन किसी भी क्षण गिर सकता है। समय रहते ही अगर इसकी मरम्मत कराकर इसे उपयोग में नहीं लाया गया तो यह भवन खंडहर में हो जाएगा।
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चार दशक पूर्व हुआ था निरीक्षण गृह का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
इलिया। उत्तर प्रदेश- बिहार की सीमा पर स्थित बनरसिया माइनर के पास बना सिंचाई विभाग का निरीक्षण गृह उपेक्षा का शिकार है। इस निरीक्षण गृह में कर्मचारियों के साथ समय-समय पर अधिकारी रुकते थे। राइट कर्मनाशा नहर द्वारा बिहार प्रांत को पानी भेजने के लिए माइनर में लगे गेट द्वारा मापी यंत्र से निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ने का जांच कार्य किया करते रहे। मगर देख-रेख के अभाव में यह भवन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
मूसाखांड़ बांध से संचालित होने वाले लतीफशाह बीयर द्वारा राइट कर्मनाशा नहर से क्षेत्र के गांव को सिंचाई के साथ ही बिहार प्रांत के कैमूर जिले के चांद प्रखंड के गांवों की सिंचाई इसी नहर से की जाती है। मानक के अनुसार पानी की आपूर्ति हो इसके लिए कर्मचारियों को बनरसिया माइनर पर ठहरने के लिए निरीक्षण गृह का निर्माण चार दशक पूर्व किया गया था। निर्माण के एक दशक तक विभागीय कर्मचारी को ठहरने के साथ ही समय-समय पर अधिकारी भी यहां ठहरते रहे। पिछले दिनों नक्सली गतिविधियों के हावी होने से भयग्रस्त सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने निरीक्षण गृह में रहना छोड़ दिया। उस दौरान कुछ दिनों तक निरीक्षण गृह में पीएसी कैंप का ठहराव किया गया था। मगर पीएसी के जवानों के चले जाने के बाद एक दशक से यह निरीक्षण गृह पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है। इसके कारण रख-रखाव के अभाव में यह भवन खंडहर में तब्दील होने की कगार पर है। बरसात के दिनों में टपकते छत के पानी से यह भवन किसी भी क्षण गिर सकता है। समय रहते ही अगर इसकी मरम्मत कराकर इसे उपयोग में नहीं लाया गया तो यह भवन खंडहर में हो जाएगा।
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