{"_id":"5c291579bdec2256ae0cbc9e","slug":"31546196345-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अति पिछड़ी जाति को प्रदेश सरकार कर रही गुमराह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अति पिछड़ी जाति को प्रदेश सरकार कर रही गुमराह
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चंदौली। अति पिछड़ों जातियों को 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का धरना सातवें दिन रविवार को भी मुख्यालय स्थित धरनास्थल पर जारी रहा। इस दौरान प्रदेश व केंद्र सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार अति पिछड़ी जातियों को गुमराह कर रही है।
इस दौरान जिलाध्यक्ष अवनीश राजभर ने कहा कि पिछड़े वर्ग में सर्वाधिक जातियों के शामिल होने के कारण अति पिछड़े वर्गों के लोगों को लाभ नहीं मिल पाता है। निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा और गौंड आदि जातियों को कोई वास्तविक लाभ न पहुंचा कर सरकार वोट के लिए केवल गुमराह कर रही है। इन जातियों की सूची को तीन हिस्सों में बांटकर उनके लिए 27 प्रतिशत के आरक्षण को उनकी आबादी के अनुपात में बांट जाए। कहा देश के कई अन्य राज्य बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु आदि में यह व्यवस्था पहले से ही लागू है। चेताया कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। इस दौरानभूपेंद्र सिंह, चंद्रमा राजभर, इंदू देवी, सुनीता कन्नौजिया, सुदर्शन, वकील, त्रिलोकी, नारद, पंचम, गोपाल, अनिरुद्ध, विजयी, दिनेश, विनोद रहे।
इस दौरान जिलाध्यक्ष अवनीश राजभर ने कहा कि पिछड़े वर्ग में सर्वाधिक जातियों के शामिल होने के कारण अति पिछड़े वर्गों के लोगों को लाभ नहीं मिल पाता है। निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा और गौंड आदि जातियों को कोई वास्तविक लाभ न पहुंचा कर सरकार वोट के लिए केवल गुमराह कर रही है। इन जातियों की सूची को तीन हिस्सों में बांटकर उनके लिए 27 प्रतिशत के आरक्षण को उनकी आबादी के अनुपात में बांट जाए। कहा देश के कई अन्य राज्य बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु आदि में यह व्यवस्था पहले से ही लागू है। चेताया कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। इस दौरानभूपेंद्र सिंह, चंद्रमा राजभर, इंदू देवी, सुनीता कन्नौजिया, सुदर्शन, वकील, त्रिलोकी, नारद, पंचम, गोपाल, अनिरुद्ध, विजयी, दिनेश, विनोद रहे।
विज्ञापन