{"_id":"5c27c7aabdec2256aa76ec07","slug":"191546110890-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छुट्टा पशु बने आफत, रखने की व्यवस्था नदारद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छुट्टा पशु बने आफत, रखने की व्यवस्था नदारद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर। छुट्टा पशु गांव के साथ शहर के लोगों के लिए भी समस्या बन गए हैं। गांव में ये फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शहर में यातायात व्यवस्था के लिए समस्या बने हुए हैं। ग्रामीणों की दिक्कत यह है कि वे इनको अगर नुकसान पहुंचाते हैं तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है और अगर इनको पकड़ लें तो रखने और चारे की समस्या आड़े आती है। शहर में बीच सड़क पर घूमते पशुओं से अक्सर दुर्घटनाएं होती है। नगर निकायों के पाए ऐसे घुमंतू पशुओं को रखने की कोई व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है। प्रशासन की ओर से कठौढ़ी गांव में बनाए जाने वाले कांजीहाऊस की योजना भी अभी लटकी हुई है।
गोवध पर रोक लगाने के शासनादेश के बाद छुट्टा पशुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। छुट्टा पशु नगर के बाजारों व गांवों में लोगों के लिए समस्या बन चुके हैं। जिला प्रशासन और नगर पालिका और नगर पंचायतों के पास इनसे लोगों को बचाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। नगर पालिका व नगर पंचायत विभाग वर्षों से काऊ कैचर मंगाकर इन पशुओं को पकड़वाने की योजना बना रहा है पर अभी तक योजना फलीभूत नहीं हो सकी है। पशुुओं को सड़कों से पकड़ने का काम तभी होता है जब कोई वीवीआईपी या वीआईपी का नगर में आगमन होता है। नगर के बाजारों सहित गलियों में इनका आतंक बढ़ता जा रहा है। कभी-कभी तो पशु आक्रामक होकर हमला कर बैठते हैं। नगर क्षेत्र में अब तक एक दर्जन से अधिक लोग चोटिल हो चुके हैं और सड़क पर खड़ा रहने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं ये आवारा पशु गांवों में झुंड बनाकर फसलों को चट कर जाते हैं। बावजूद इन घटनाओं के अभी तक इनपर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
जिला प्रशासन ने कुछ दिनों पूर्व कठौड़ी गांव के प्राथमिक विद्यालय के समीप लगभग डेढ़ हेक्टेयर जमीन का चयन कांजीहाऊस बनवाने के लिए किया गया है। कांजीहाऊस के निर्माण के लिए शासन से 1.20 करोड़ रुपये स्वीकृत भी हो चुके हैं। इसके बाद जमीन की पैमाइश भी कराई जा चुकी है। मगर इसके बाद प्रशासन की ओर से अब तक काम नहीं शुरू कराया जा सका है।
गोवध पर रोक लगाने के शासनादेश के बाद छुट्टा पशुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। छुट्टा पशु नगर के बाजारों व गांवों में लोगों के लिए समस्या बन चुके हैं। जिला प्रशासन और नगर पालिका और नगर पंचायतों के पास इनसे लोगों को बचाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। नगर पालिका व नगर पंचायत विभाग वर्षों से काऊ कैचर मंगाकर इन पशुओं को पकड़वाने की योजना बना रहा है पर अभी तक योजना फलीभूत नहीं हो सकी है। पशुुओं को सड़कों से पकड़ने का काम तभी होता है जब कोई वीवीआईपी या वीआईपी का नगर में आगमन होता है। नगर के बाजारों सहित गलियों में इनका आतंक बढ़ता जा रहा है। कभी-कभी तो पशु आक्रामक होकर हमला कर बैठते हैं। नगर क्षेत्र में अब तक एक दर्जन से अधिक लोग चोटिल हो चुके हैं और सड़क पर खड़ा रहने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं ये आवारा पशु गांवों में झुंड बनाकर फसलों को चट कर जाते हैं। बावजूद इन घटनाओं के अभी तक इनपर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
विज्ञापन
जिला प्रशासन ने कुछ दिनों पूर्व कठौड़ी गांव के प्राथमिक विद्यालय के समीप लगभग डेढ़ हेक्टेयर जमीन का चयन कांजीहाऊस बनवाने के लिए किया गया है। कांजीहाऊस के निर्माण के लिए शासन से 1.20 करोड़ रुपये स्वीकृत भी हो चुके हैं। इसके बाद जमीन की पैमाइश भी कराई जा चुकी है। मगर इसके बाद प्रशासन की ओर से अब तक काम नहीं शुरू कराया जा सका है।
विज्ञापन