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राम सरिस बरु दुलहिनि सीता। समधी दसरथु जनकु पुनीता ।।
Updated Sun, 14 Oct 2018 12:52 AM IST
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कंदवा। क्षेत्र के अरंगी गांव में चल रही रामलीला के पांचवें दिन में शुक्रवार की रात राम विवाह की लीला हुई। इस दौरान राम-जानकी का पूरे विधि-विधान से विवाह संपन्न हुआ।। इधर जनक की खुशियों का कोई ठिकाना न था तो वहीं दूत पहुंचते ही अयोध्या में भी उल्लास छा गया। राम द्वारा धनुष तोड़े जाने और सीता के साथ विवाह की सूचना से पूरे अयोध्या में हर्ष और उल्लास छा जाता है।
महाराज दशरथ प्रसन्न मुद्रा में भरत से श्रीराम के बारात के लिए हाथी,घोड़ा और रथ तैयार करवाने को कहते हैं। सुमंत दो रथ लेकर आते हैं। एक रथ पर राजा दशरथ और दूसरे पर कुल गुरु वशिष्ठ सवार होते हैं। इसके बाद बारात जनकपुर के लिए प्रस्थान करती है। बारात के जनकपुर पहुंचते ही महाराज जनक की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं रहा ।अवधपुरी से आई बारात के स्वागत के लिए मिथिला को भव्य तरीके से सजाया गया था। महाराज जनक बारात का भव्य स्वागत करते हैं। जैसे ही राम। जानकी का विवाह शुरू होता है वैसे ही मंगल गीत के साथ पुष्प वर्षा होने लगती है। चारो तरफ हर हर महादेव का जयकारा लगने लगता है । लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
महाराज दशरथ प्रसन्न मुद्रा में भरत से श्रीराम के बारात के लिए हाथी,घोड़ा और रथ तैयार करवाने को कहते हैं। सुमंत दो रथ लेकर आते हैं। एक रथ पर राजा दशरथ और दूसरे पर कुल गुरु वशिष्ठ सवार होते हैं। इसके बाद बारात जनकपुर के लिए प्रस्थान करती है। बारात के जनकपुर पहुंचते ही महाराज जनक की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं रहा ।अवधपुरी से आई बारात के स्वागत के लिए मिथिला को भव्य तरीके से सजाया गया था। महाराज जनक बारात का भव्य स्वागत करते हैं। जैसे ही राम। जानकी का विवाह शुरू होता है वैसे ही मंगल गीत के साथ पुष्प वर्षा होने लगती है। चारो तरफ हर हर महादेव का जयकारा लगने लगता है । लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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