{"_id":"5bc0f2a8bdec22695a4bd8c1","slug":"181539371688-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां चंद्रघटा का किया शृंगार, उतारी भव्य आरती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां चंद्रघटा का किया शृंगार, उतारी भव्य आरती
Updated Sat, 13 Oct 2018 01:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीडीडीयू नगर। शक्ति उपासकों का महापर्व शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन माता के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की गई। भक्तों के वैभव की रक्षा करने वाली महिषासुर मर्दिनी के दर्शन-पूजन के लिए शुक्रवार को देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। दिन भर मंदिरों में माता के जयकारे होते रहे। शाम को देवी मंदिरों में भजन-कीर्तन का सिलसिला शुरू हुआ तो देर रात तक चला।
नगर के जीटी रोड स्थित प्राचीन काली मंदिर, रविनगर, नई बस्ती, कैलाशपुरी, शाहकुटी, कैथापुर, परशुरामपुर, अमोघपुर, गल्ला मंडी, एलबीएस मार्केट स्थित संकट हरण दरबार सहित विभिन्न देवी मंदिरों पर सूर्योदय के पहले ही भक्त पहुंच गए। इसी तरह रेलवे के आरपीएफ कालोनी, गया कालोनी, प्लांट डिपो, लोको कालोनी, यूरोपियन कालोनी, डीजल कालोनी सहित विभिन्न कालोनियों में दुर्गा मंदिरों पर भक्तों ने माता के चरणों से शीश नवाया और आशीर्वाद लिया। व्रतियों ने फूल, माला, चुनरी, इत्र से माता का शृंगार किया और धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर भव्य आरती उतारी। इसके साथ ही माता के खूब जयकारे लगाए। देवी मंदिरों पर सुबह से देर रात तक जयकारे लगते रहे और घंट-घड़ियाल की गूंज होती रही। घरों में भी लोगों ने माता के कलश की विधि विधान से पूजा अर्चना की और दुर्गा सप्तशति और दुर्गा चालीसा का पाठ किया।
विज्ञापन
नगर के जीटी रोड स्थित प्राचीन काली मंदिर, रविनगर, नई बस्ती, कैलाशपुरी, शाहकुटी, कैथापुर, परशुरामपुर, अमोघपुर, गल्ला मंडी, एलबीएस मार्केट स्थित संकट हरण दरबार सहित विभिन्न देवी मंदिरों पर सूर्योदय के पहले ही भक्त पहुंच गए। इसी तरह रेलवे के आरपीएफ कालोनी, गया कालोनी, प्लांट डिपो, लोको कालोनी, यूरोपियन कालोनी, डीजल कालोनी सहित विभिन्न कालोनियों में दुर्गा मंदिरों पर भक्तों ने माता के चरणों से शीश नवाया और आशीर्वाद लिया। व्रतियों ने फूल, माला, चुनरी, इत्र से माता का शृंगार किया और धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर भव्य आरती उतारी। इसके साथ ही माता के खूब जयकारे लगाए। देवी मंदिरों पर सुबह से देर रात तक जयकारे लगते रहे और घंट-घड़ियाल की गूंज होती रही। घरों में भी लोगों ने माता के कलश की विधि विधान से पूजा अर्चना की और दुर्गा सप्तशति और दुर्गा चालीसा का पाठ किया।
विज्ञापन