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उर्वरक का महंगा होना किसान हित में नहीं
Updated Wed, 28 Jun 2017 01:11 AM IST
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कंदवा। किसानों में एकीकृत कर प्रणाली जीएसटी को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। कोई इसे किसानों के हित में बता रहा है तो कोई किसानों के हित के खिलाफ बता रहा है। बहरहाल जो भी हो 30 जून की आधी रात को होने वाले ऐतिहासिक फैसले का क्षेत्र के किसानों को बेसब्री से इंतजार है। किसानों का कहना है कि जीएसटी से अगर उर्वरक के दाम बढ़े तो महंगाई बढ़ना तय है जो किसी भी तरह किसानों के हित में नहीं है।
इस संबंध में इमिलिया गांव निवासी किसान सतेंद्र सिंह का कहना है कि वैसे तो जीएसटी कर प्रणाली को लेकर मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन ऐसा सुनने में आ रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद उर्वरक व कीटनाशक दवाइयां महंगी हो जाएंगी जो किसानों के हित में नहीं है। क्षेत्र के बरहनी गांव निवासी प्रगतिशील किसान अखिलेश सिंह गुड्डू का कहना है कि चाहे जो भी कर व्यवस्था केंद्र सरकार लागू करे वह देश व किसानों के हित में होनी चाहिए क्योंकि किसान पहले से ही सूखा व प्राकृतिक आपदा झेलते हुए काफी व्यथित है। अगर अब और महंगाई की मार झेलनी पड़ी तो किसान अपना पुश्तैनी धंधा खेती छोड़कर आजीविका के लिए पलायन करने को विवश हो जाएगा। भदखरी गांव निवासी किसान अजय सिंह का कहना है कि जीएसटी को लेकर लोग भ्रमित है। कहा कि ऐसा सुनने में आ रहा है कि ज्यादातर वस्तुओं की कीमतें बढने जा रही हैं जो किसानों के लिए अहितकर साबित होगा। भरहुलिया गांव निवासी किसान रामा पाल का कहना है कि पहले से ही नोटबंदी की त्रासदी से किसानों की खेती- किसानी चौपट हो चुकी है। अब बची-खुची कसर जीएसटी पूरी कर देगा। उनका कहना है कि सुनने में आ रहा है कि खेती किसानी से संबंधित वस्तुओं में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है।
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इस संबंध में इमिलिया गांव निवासी किसान सतेंद्र सिंह का कहना है कि वैसे तो जीएसटी कर प्रणाली को लेकर मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन ऐसा सुनने में आ रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद उर्वरक व कीटनाशक दवाइयां महंगी हो जाएंगी जो किसानों के हित में नहीं है। क्षेत्र के बरहनी गांव निवासी प्रगतिशील किसान अखिलेश सिंह गुड्डू का कहना है कि चाहे जो भी कर व्यवस्था केंद्र सरकार लागू करे वह देश व किसानों के हित में होनी चाहिए क्योंकि किसान पहले से ही सूखा व प्राकृतिक आपदा झेलते हुए काफी व्यथित है। अगर अब और महंगाई की मार झेलनी पड़ी तो किसान अपना पुश्तैनी धंधा खेती छोड़कर आजीविका के लिए पलायन करने को विवश हो जाएगा। भदखरी गांव निवासी किसान अजय सिंह का कहना है कि जीएसटी को लेकर लोग भ्रमित है। कहा कि ऐसा सुनने में आ रहा है कि ज्यादातर वस्तुओं की कीमतें बढने जा रही हैं जो किसानों के लिए अहितकर साबित होगा। भरहुलिया गांव निवासी किसान रामा पाल का कहना है कि पहले से ही नोटबंदी की त्रासदी से किसानों की खेती- किसानी चौपट हो चुकी है। अब बची-खुची कसर जीएसटी पूरी कर देगा। उनका कहना है कि सुनने में आ रहा है कि खेती किसानी से संबंधित वस्तुओं में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है।
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