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गंगा किनारे के गांवों में बनेगा सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
Updated Thu, 17 May 2018 01:08 AM IST
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चंदौली। पंचायती राज विभाग की ओर से सदानीरा गंगा के तटवर्ती 47 ग्राम पंचायतों को कचरा मुक्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया जाएगा। नालियों का पानी नदी में न गिरे इसके लिए सोख्ता तालाब बनाए जाएंगे। घरों से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाई जाएगी। कूड़ा उठाने और उर्वरक बनाने का काम एनआरएलएम समूह की महिलाएं करेंगी। इस योजना से महिलाओं को रोजगार मिलेगा और किसानों को भी लाभ पहुंचेगा।
केंद्र सरकार के निर्देश पर जिले में गंगा नदी के किनारे बसी 47 ग्राम पंचायतों को कचरा मुक्त करने का खाका तैयार कर लिया गया है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार इन गांवों में सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा। एक प्लांट पर 10 से 35 लाख रुपये तक का खर्च आएगा। घरों के आगे दो डस्टबिन रखे जाएंगे। एक में गलने वाला कूड़ा और दूसरे में नष्ट नहीं होने वाला कूड़ा रखा जाएगा। एनआरएलएम समूह की महिलाएं गलने वाले कूड़े को ट्राईसाइकल पर लादकर प्लांट तक पहुंचाएंगी और नष्ट नहीं होने वाले कूड़े को गांव के दूर गिराया जाएगा। जो कूड़ा गलने योग्य होगा उससे खाद बनाई जाएगी और कम दाम पर किसानों को बेेची जाएगी। गांव में प्रत्येक परिवार से प्रतिदिन तीन रुपये और दुकानदारों से पांच रुपये लिए जाएंगे। कार्यक्रम समन्वयक अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि इन सबसे जो भी धन जमा होगा उसे समूहों पर खर्च किया जाएगा।
सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजेंट प्लांट बनने से गांव के कचरे का निस्तारण होगा। साथ ही गांव का गंदा पानी गंगा में न जाए। इसके लिए सोख्ता तालाब बनाए जाएंगे। इन तालाबों में गांवों की नाली और शौचालयों का पानी जमा होगा। गांवों में प्लास्टिक पर भी बैन लगेगा।
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गंगा किनारे की 47 ग्राम पंचायतों में जल्द ही सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजेंट प्लांट निर्माण कार्य कराया जाएगा। इसके लिए वार रूम को सक्रिय कर दिया गया है। दो माह के भीतर योजना मूर्त रूप ले लेगी। डीपीआरओ उमाशंकर मिश्र।
केंद्र सरकार के निर्देश पर जिले में गंगा नदी के किनारे बसी 47 ग्राम पंचायतों को कचरा मुक्त करने का खाका तैयार कर लिया गया है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार इन गांवों में सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा। एक प्लांट पर 10 से 35 लाख रुपये तक का खर्च आएगा। घरों के आगे दो डस्टबिन रखे जाएंगे। एक में गलने वाला कूड़ा और दूसरे में नष्ट नहीं होने वाला कूड़ा रखा जाएगा। एनआरएलएम समूह की महिलाएं गलने वाले कूड़े को ट्राईसाइकल पर लादकर प्लांट तक पहुंचाएंगी और नष्ट नहीं होने वाले कूड़े को गांव के दूर गिराया जाएगा। जो कूड़ा गलने योग्य होगा उससे खाद बनाई जाएगी और कम दाम पर किसानों को बेेची जाएगी। गांव में प्रत्येक परिवार से प्रतिदिन तीन रुपये और दुकानदारों से पांच रुपये लिए जाएंगे। कार्यक्रम समन्वयक अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि इन सबसे जो भी धन जमा होगा उसे समूहों पर खर्च किया जाएगा।
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सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजेंट प्लांट बनने से गांव के कचरे का निस्तारण होगा। साथ ही गांव का गंदा पानी गंगा में न जाए। इसके लिए सोख्ता तालाब बनाए जाएंगे। इन तालाबों में गांवों की नाली और शौचालयों का पानी जमा होगा। गांवों में प्लास्टिक पर भी बैन लगेगा।
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गंगा किनारे की 47 ग्राम पंचायतों में जल्द ही सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजेंट प्लांट निर्माण कार्य कराया जाएगा। इसके लिए वार रूम को सक्रिय कर दिया गया है। दो माह के भीतर योजना मूर्त रूप ले लेगी। डीपीआरओ उमाशंकर मिश्र।