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बारिश के पानी रोकने का नहीं है कोई इंतजाम
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पीडीडीयू नगर। जिले में तेजी से नीचे भाग रहे भूगर्भ जलस्तर को बचाने के लिए कागजों पर कवायद तो होती है मगर हकीकत में कोई ठोस पहल अब तक नहीं हो सकी है। बरसात में छतों से गिरने वाला बारिश का पानी नालियों-नालों के जरिए बर्बाद हो जाता है। सरकारी भवनों में भी पूरी तरह से रेन वाटर हार्वेस्टिंग से लैस नहीं हो सके हैं। निजी भवनों में भी इसकी व्यवस्था नहीं है। इसके लिए जिला प्रशासन या जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई जागरूकता अभियान भी नहीं चला जिससे की लोग इसके प्रति जागरूक हों और पानी संरक्षण के लिए काम करें।
सरकारी आंकड़े पर गौर करें तो मनरेगा के तहत 352 सरकारी तालाबों का सुंदरीकरण कराकर जल संरक्षण की योजना बनी। लेकिन कई तालाब हैं जो सूख चुके हैं और उनमें धूल उड़ रही है। इसके अलावा पुराने सरकारी भवनों मेें तो अब तक व्यवस्था नहीं हो सकी है। नए बन रहे निजी भवनों में जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। मनमाने तरीके से बनाए जा रहे हैं। मनरेगा के उपनिदेशक धर्मनाथ सिंह का कहना है कि तालाबों के संरक्षण कर उसमें पानी रोका जाता है। ताकि भूगर्भ जल स्तर बना रहे। निजी तालाबों के मालिकों को भी इसके लिए प्रेरित और जागरूक किया जाता है।
सरकारी आंकड़े पर गौर करें तो मनरेगा के तहत 352 सरकारी तालाबों का सुंदरीकरण कराकर जल संरक्षण की योजना बनी। लेकिन कई तालाब हैं जो सूख चुके हैं और उनमें धूल उड़ रही है। इसके अलावा पुराने सरकारी भवनों मेें तो अब तक व्यवस्था नहीं हो सकी है। नए बन रहे निजी भवनों में जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। मनमाने तरीके से बनाए जा रहे हैं। मनरेगा के उपनिदेशक धर्मनाथ सिंह का कहना है कि तालाबों के संरक्षण कर उसमें पानी रोका जाता है। ताकि भूगर्भ जल स्तर बना रहे। निजी तालाबों के मालिकों को भी इसके लिए प्रेरित और जागरूक किया जाता है।
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