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जट्रोफा खाने से तीन अचेत, अस्पताल में भर्ती
Updated Wed, 07 Nov 2018 08:45 PM IST
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चंदौली। सदर विकास भवरही गांव में मंगलवार की देर शाम जेट्रोफा के बीज खाने से तीन बालिकाएं अचेत हो गई। जानकारी होते ही परिवार के लोगों में कोहराम मच गया। आनन फानन में तीनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां देर रात उपचार के बाद उनकी हालत ठीक हो गई। इमरजेंसी चिकित्सक डा. संजय कुमार ने बताया कि बालिकाओं की हालत सामान्य है और उपचार अभी भी चल रहा है।
क्षेत्र के भवरही निवासी रामजी की पुत्री नीतू(10) बहन खुशी(5) और अपनी सहेली ज्योति(10) के साथ मंगलवार की देर शाम गांव के बाहर पोखरे पर गई थी। वहीं जेट्रोफा के बीज गिरे थे, जिसे तीनों ने खा लीं और एकत्र करके घर भी ले आईं। घर पहुंचते ही उनकी हालत बिगड़ने लगी। यह देख परिवार के लोग परेशान हो गए। जब उनकी तलासी ली तो बालिकाओं के जेब से जट्रोफा के बीज मिलने पर सभी लोगों के होश उड़ गए। तीनों को मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां चिकित्सकों के अथक प्रयास और उपचार के बाद कई घंटे बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। तब जाकर परिवार के लोगों को राहत मिली। बालिकाओं के परिवार के लाल बहादुर और रामजी ने बताया कि खेलन के दौरान जट्रोफा का बीज खाने से वह बिमार हुई थी। उपचार के बाद स्थिती अब काबू में है। ईएमओ डा. संजय कुमार ने बताया कि बुधवार की सुबह बालिकाओं की स्थिति बेहतर होने पर तीनों को जरूरी दवाएं देने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
क्षेत्र के भवरही निवासी रामजी की पुत्री नीतू(10) बहन खुशी(5) और अपनी सहेली ज्योति(10) के साथ मंगलवार की देर शाम गांव के बाहर पोखरे पर गई थी। वहीं जेट्रोफा के बीज गिरे थे, जिसे तीनों ने खा लीं और एकत्र करके घर भी ले आईं। घर पहुंचते ही उनकी हालत बिगड़ने लगी। यह देख परिवार के लोग परेशान हो गए। जब उनकी तलासी ली तो बालिकाओं के जेब से जट्रोफा के बीज मिलने पर सभी लोगों के होश उड़ गए। तीनों को मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां चिकित्सकों के अथक प्रयास और उपचार के बाद कई घंटे बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। तब जाकर परिवार के लोगों को राहत मिली। बालिकाओं के परिवार के लाल बहादुर और रामजी ने बताया कि खेलन के दौरान जट्रोफा का बीज खाने से वह बिमार हुई थी। उपचार के बाद स्थिती अब काबू में है। ईएमओ डा. संजय कुमार ने बताया कि बुधवार की सुबह बालिकाओं की स्थिति बेहतर होने पर तीनों को जरूरी दवाएं देने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
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