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माता-पिता ही मनुष्य के प्रथम गुरू - मुकेश आनंद
Updated Tue, 13 Nov 2018 12:53 AM IST
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शिकारगंज। जागेश्वरनाथ सेवा समिति की ओर से धाम परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा वक्ता मुकेश आनंद महराज ने कहा कि माता-पिता ही मनुष्य के प्रथम गुरू हैं। इनके जरिये मानव को संस्कार का ज्ञान होता है।
उन्होंने कहा कि ससुराल जाने पर स्त्री की माता उसकी सास होती है। इसलिए सास के साथ मां के समान व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सास का भी कर्तव्य है कि वह अपनी बहु को बेटी के समान समझे। इससे पारिवारिक सामंजस्य मजबूत होता है। उन्होंने भगवान शिव के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि ब्रम्हा जी ने सबसे पहले भूत, प्रेत, पशु, पक्षी के साथ सृष्टि का निर्माण किया। इससे भगवान शिव के बारात में बाराती रहे। उन्होंने राख के अंतर का वर्णन करते हुए कहा कि राख और भस्म अलग-अलग नाम है, खाना पकाने के चुल्हे से बनने वाली ढेर को राख तथा चिता पर जो आग लगता उसके जले राख को भस्म की संज्ञा दी गई है। उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण करने से मनुष्य भव लोक को पार कर जाता है। इस मौके पर महंत कैलाशनाथ गिरी, अरविंद सिंह, अंबुज मोदनवाल, रामभरोस, विजयानंद, रविन्द्रनाथ दुबे, योगेन्द्र बहादुर सिंह, जर्नादन सिंह, शेषधर सिंह मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि ससुराल जाने पर स्त्री की माता उसकी सास होती है। इसलिए सास के साथ मां के समान व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सास का भी कर्तव्य है कि वह अपनी बहु को बेटी के समान समझे। इससे पारिवारिक सामंजस्य मजबूत होता है। उन्होंने भगवान शिव के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि ब्रम्हा जी ने सबसे पहले भूत, प्रेत, पशु, पक्षी के साथ सृष्टि का निर्माण किया। इससे भगवान शिव के बारात में बाराती रहे। उन्होंने राख के अंतर का वर्णन करते हुए कहा कि राख और भस्म अलग-अलग नाम है, खाना पकाने के चुल्हे से बनने वाली ढेर को राख तथा चिता पर जो आग लगता उसके जले राख को भस्म की संज्ञा दी गई है। उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण करने से मनुष्य भव लोक को पार कर जाता है। इस मौके पर महंत कैलाशनाथ गिरी, अरविंद सिंह, अंबुज मोदनवाल, रामभरोस, विजयानंद, रविन्द्रनाथ दुबे, योगेन्द्र बहादुर सिंह, जर्नादन सिंह, शेषधर सिंह मौजूद रहे।
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