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नमक के लिए तरस रहे चंद्रप्रभा के वन्य जीव
Updated Sat, 06 Oct 2018 12:44 AM IST
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चकिया। काशी वन्य जीव प्रभाग में स्थित प्रदेश के सबसे पुराने वन्य जीव विहार के वन्य जीव पिछले पांच वर्षों से नमक के लिए तरस रहे हैं। वन्य जीव विहार के वन्य जीव सिर्फ पानी के सहारे ही जीवन-यापन करने को बाध्य हैं। वन विभाग के पास वन्य जीवों के लिए नमक खरीदने तक का पैसा नही है, जबकि प्रदेश सरकार एवं वन विभाग वन्य जीव संरक्षण का ढिंढोरा पीटता घूम रहा है। काशी वन्य जीव प्रभाग में 9600 हेक्टेयर वन भूमि का अधिग्रहण कर वर्ष 1957 में चंद्रप्रभा वन्य जीव बिहार की स्थापना की गई थी। इसके अंतर्गत शिकारगंज, सदापुर, भैसड़ा, बूढ़न, घुसुरिया, चंद्रप्रभा, बलियारी, सेमरा वन क्षेत्र को सम्मिलित कर इसे वन्य जीवों के लिए सुरक्षित प्रवास के रूप में विकसित किया गया था। इस वन्य जीव बिहार में वर्तमान में तेंदुआ, चिंकारा, बनरोज, सांभर, चीतल, भालू, सुअर, मगरमच्छ, भेड़िया, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सियार, मोर, साही तथा गोह जैसे वन्य जीव प्रवास करते हैं। इन वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र में आहार के लिए आवंला, हर्रा, बहेड़ा, ककोर, पिआर, मकोय तथा तेंदू के वृक्षो को लगाया गया। बाद में वन्य जीवो के आहार पर मानव एवं पालतू पशुओ का कब्जा हो गया। इससे वन्य जीवों के सामने आहार का संकट खड़ा है। वहीं वन विभाग प्रति वर्ष पशु रोगों से बचाने एवं वन्य जीवों की पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए नमक की ढेरिया वन क्षेत्र में जगह जगह गिराता था। इसके अतिरिक्त वन्य जीवों के पानी पीने के लिए वाटर होल्स तथा चेकडैमो का भी निर्माण कराया गया है। वन विभाग के सूत्रों की माने तो पिछले पांच वर्षो से वन्य जीव बिहार में नमक नही गिराया जा रहा है। इससे वन्य जीवों के पाचन शक्ति पर प्रभाव पड़ रहा है। इनके शरीर में सोडियम की कमी के कारण पशु रोग हो रहे है। चन्द्रप्रभा वन्य जीव विहार के वन क्षेत्राधिकारी बृजेश पांडेय ने कहा कि वन्य जीव विहार में नमक जगह-जगह गिराने के लिए नमक की खरीददारी की जा रही है। जल्द ही वन्य जीव विहार में वन्य जीवों के लिए नमक की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
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