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सरकारी भूमिपर नहीं रख सकेगें महापुरुषो की मूर्ति
Updated Sat, 14 Apr 2018 12:31 AM IST
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चंदौली। सरकारी जमीन पर महापुरुषों की मूर्ति रखकर कब्जा करने पर सरकार ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। अब मूर्ति स्थापना करने से पूर्व किसी भी संस्था की ओर से पहले सरकारी या निजी जमीन की रजिस्ट्री करानी होगी। रजिस्ट्री के बाद जब संस्था का नाम खतौनी में दर्ज हो जाएगा। इसके बाद शासन से अनुमति मिलेगी। शासन से इस बाबत दिशा निर्देश भी जिला प्रशासन को भेज दिया गया है।
शासन को शिकायत मिल रही थी कि सरकारी जमीनों पर किसी महापुरुष की मूर्ति रखकर उस पर कब्जा कर लिया जाता था। इससे विवाद भी बढ़ता था और जमीन का दुरुपयोग होता था। इस पर नकेल कसने के लिए शासन ने जिला प्रशासन को पत्र भेजा है। ताकि ऐसी जमीनों पर कब्जा होने से रोका जा सके। इससे विवाद तो बढ़ता ही है कभी-कभी काफी तनाव पैदा हो जाता है और अशांति फैलती है। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने ऐसे विवाद को समाप्त करने के लिए सरकारी भूमि पर महापुरुषो की मूर्ति रखने से साफ मना कर दिया है। सरकारी भूमि पर मूर्ति न लगने पाए इसके लिए जिलाधिकारी को शासनादेस भेज दिया गया है। जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने बताया कि शासन स्तर से दिशा निर्देश प्राप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि किसी भी स्थिति में सरकारी भूमि चाहे वह ग्राम सभा की हो या फिर अन्य किसी प्रकार की जमीन इन जमीनों पर मूर्ति स्थापित नहीं होगी। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को मूर्ति स्थापित करना होगा वह संगठन या फिर स्वयं के माध्यम से जमीन रजिस्ट्री करेगें। खतौनी में जब संगठन का नाम दर्ज होगा। उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही स्थापना होगी।
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शासन को शिकायत मिल रही थी कि सरकारी जमीनों पर किसी महापुरुष की मूर्ति रखकर उस पर कब्जा कर लिया जाता था। इससे विवाद भी बढ़ता था और जमीन का दुरुपयोग होता था। इस पर नकेल कसने के लिए शासन ने जिला प्रशासन को पत्र भेजा है। ताकि ऐसी जमीनों पर कब्जा होने से रोका जा सके। इससे विवाद तो बढ़ता ही है कभी-कभी काफी तनाव पैदा हो जाता है और अशांति फैलती है। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने ऐसे विवाद को समाप्त करने के लिए सरकारी भूमि पर महापुरुषो की मूर्ति रखने से साफ मना कर दिया है। सरकारी भूमि पर मूर्ति न लगने पाए इसके लिए जिलाधिकारी को शासनादेस भेज दिया गया है। जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने बताया कि शासन स्तर से दिशा निर्देश प्राप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि किसी भी स्थिति में सरकारी भूमि चाहे वह ग्राम सभा की हो या फिर अन्य किसी प्रकार की जमीन इन जमीनों पर मूर्ति स्थापित नहीं होगी। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को मूर्ति स्थापित करना होगा वह संगठन या फिर स्वयं के माध्यम से जमीन रजिस्ट्री करेगें। खतौनी में जब संगठन का नाम दर्ज होगा। उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही स्थापना होगी।
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