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गंगा किनारे के किसान करें खस की खेती
Updated Tue, 22 May 2018 12:58 AM IST
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चंदौली। किसानों की आय को दुगुना करने के लिए केंद्र की सरकार जोर दे रही है। इसके लिए सोमवार को लखनऊ सीमैप संस्था के वैज्ञानिकों ने कृषि विज्ञान केंद्र में दो दिवसीय कार्यशाला में औषधीय व सुगंधित खेती करने पर जोर दिया। इसके साथ ही सुगंधित खेती करने के लिए किसानों को प्रशिक्षित किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि गंगा के किनारे वाले किसान खस की खेती कर अच्छा मुनाफा ले सकते हैं।
इस दौरान सीमैप के वैज्ञानिक डॉ. राजेश वर्मा ने किसानों से कहा कि वह धान गेहूं के अलावा मेंथा की खेती कर अच्छी कमाई कर सकते है। जबकि गंगा के किनारे वाले किसान खस की खेती कर लाखो रुपया अर्जित कर सकते है। उन्होंने बताया कि खस की खेती किसी भी जलवायु में की जा सकती है। इसके लिए बलुई मिट्टी सबसे अच्छी होती है। बलुई मिट्टी में इसके मूसलादार जड़ों का विकास होता है। खस के जड़ों से तेल निकाला जाता है। जिससे इत्र, सेंट आदि बनाया जाता है। वहीं तेल निकालने के बाद बचे अपशिष्ट पदार्थों से चटाई, कुशन, हैंड बैग आदि बनाए जाते हैं। इसकी खेती जुलाई माह से प्रारंभ होती है। सीमैप किसानों को प्रोत्साहन के लिए दो एकड़ तक बीज नि:शुल्क देगी। वहीं कम पानी व उबड़-खाबड़ वाले मैदान के लिए लेमन ग्रास की खेती को वरदान बताया। डॉ.मनोज ने बताया कि खस व लेमन ग्रास की खेती में प्रति एकड़ 10-15 हजार रुपये खर्च है। एक एकड़ में 8-10 लीटर तक तेल पैदा होता है। जिसकी कीमत बाजार में 27 हजार रुपया प्रति लीटर है। डीएम नवनीत सिंह चहल ने कहा कि जिले के किसानों को प्रशिक्षित कराने के लिए सीमैप की संस्था लखनऊ में भेजकर प्रशिक्षण कराया जाएगा। इस दौरान प्रशिक्षु आईएएस आनन्द कुमार, डॉ. आरपी रघुवंशी, एसराम भारती, जिला कृषि अधिकारी एस राम भारती, उप कृषि निदेशक राजेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
इस दौरान सीमैप के वैज्ञानिक डॉ. राजेश वर्मा ने किसानों से कहा कि वह धान गेहूं के अलावा मेंथा की खेती कर अच्छी कमाई कर सकते है। जबकि गंगा के किनारे वाले किसान खस की खेती कर लाखो रुपया अर्जित कर सकते है। उन्होंने बताया कि खस की खेती किसी भी जलवायु में की जा सकती है। इसके लिए बलुई मिट्टी सबसे अच्छी होती है। बलुई मिट्टी में इसके मूसलादार जड़ों का विकास होता है। खस के जड़ों से तेल निकाला जाता है। जिससे इत्र, सेंट आदि बनाया जाता है। वहीं तेल निकालने के बाद बचे अपशिष्ट पदार्थों से चटाई, कुशन, हैंड बैग आदि बनाए जाते हैं। इसकी खेती जुलाई माह से प्रारंभ होती है। सीमैप किसानों को प्रोत्साहन के लिए दो एकड़ तक बीज नि:शुल्क देगी। वहीं कम पानी व उबड़-खाबड़ वाले मैदान के लिए लेमन ग्रास की खेती को वरदान बताया। डॉ.मनोज ने बताया कि खस व लेमन ग्रास की खेती में प्रति एकड़ 10-15 हजार रुपये खर्च है। एक एकड़ में 8-10 लीटर तक तेल पैदा होता है। जिसकी कीमत बाजार में 27 हजार रुपया प्रति लीटर है। डीएम नवनीत सिंह चहल ने कहा कि जिले के किसानों को प्रशिक्षित कराने के लिए सीमैप की संस्था लखनऊ में भेजकर प्रशिक्षण कराया जाएगा। इस दौरान प्रशिक्षु आईएएस आनन्द कुमार, डॉ. आरपी रघुवंशी, एसराम भारती, जिला कृषि अधिकारी एस राम भारती, उप कृषि निदेशक राजेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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