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पीड़ितों के लिए भगवान बना अंकुर संस्था

Tue, 05 Dec 2017 12:25 AM IST
Updated Tue, 05 Dec 2017 12:25 AM IST
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पीड़ितों के लिए भगवान बना अंकुर संस्था

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कंदवा। बरहनी विकास खंड के करौती गांव के मल्लाह बस्ती में रविवार को हुए अग्निकांड से प्रभावित लोगों में सामाजिक संस्था अंकुर समाज वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने सोमवार को खाद्य सामग्री , कंबल और दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं का वितरण किया। साथ ही इस घटना में अपना सब कुछ गंवा चुके हनुमान चौधरी की पुत्री की शादी में मदद का भी आश्वासन दिया ।
रविवार को करौती गांव की मल्लाह बस्ती में अज्ञात कारणों से लगी आग के चलते हनुमान चौधरी, लालचंद, लल्लन, बलराम और फूल्लन चौधरी की 10 रिहायशी झोपड़ियां जलकर राख हो गई थीं। अगलगी कि इस घटना में पीड़ित परिवारों का सब कुछ जल कर खाक हो गया और पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे आने के साथ ही दाने दाने को मोहताज हो गया। हनुमान चौधरी की बेटी की शादी के लिए रखे आभूषण, साड़ियां और अन्य सामग्री भी जलकर राख हो गई थी। सोमवार को अंकुर समाज वेलफेयर सोसाइटी के सचिव अजय सिंह अपने सहयोगी कार्यकर्ताओं के साथ करौती गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों में चावल , आटा, आलू, नमक, तेल, मसाला और कंबल के साथ दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं का वितरण किया। ऐसे में हम पीड़ितों के तकलीफ को पूर्ण रूप से समाप्त तो नहीं कर सकते, लेकिन थोड़ी राहत जरूर दे सकते हैं। इस दौरान अंबरीश सिंह सोनू , अमरेंद्र प्रताप सिंह, लल्लू सिंह, आनंद उपाध्याय, शिवानंद उपाध्याय, ऋषि यादव, लालबिहारी प्रजापति, चंदन पांडेय, शांतनु पांडेय, अजय पांडेय आदि मौजूद रहे।
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अगलगी के पीड़ितों को रात गुजारना हुआ मुश्किल
कंदवा(ब्यूरो)। क्षेत्र के करौती गांव में अज्ञात कारणों से लगी आग से 10 रिहायशी झोपड़ियां जलकर राख हो गई थीं। अगलगी से बेघर हुए परिवार का ठंड में रात गुजारना कठिन हो गया है। पीड़ित परिवार के सदस्य बच्चों को ठंड से बचाने के लिए शाम को पुआल जला रहे हैं। इस अग्निकांड से गृहस्थी का सारा समान जल कर नष्ट हो गया है। पीड़ित परिवार के सामने भोजन की समस्या उत्पन्न हो गई है। । क्षेत्रीय लेखपाल घटना के दिन ही मौका मुआयना कर वापस लौट गए थे, लेकिन प्रशासन की ओर से दूसरे दिन कोई मदद नहीं मिल सकी है। पीड़ित हनुमान का कहना है कि शासन स्तर पर उन्हें किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिली है और ना ही कोई जनप्रतिनिधि उनके घर पहुंचा है।
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